उच्च न्यायालय की भी की गई अवमानना:

प्रयागराज। गंभीर अनियमित और अराजकता के आरोप में कार्मिक से हटाकर मुख्यालय में अटैच किए गए मुबारक अली के एक से बढ़कर एक कारनामें सामने आ रहे हैं। जानकारी मिली है की मुबारक अली की पोस्टिंग के लिए हाई कोर्ट के आदेश की खुली अवहेलना की गई है। इतना ही नहीं उच्च न्यायालय ने मुजफ्फरनगर के एक प्रकरण में ऐसी व्यवस्था दी थी कि जो कहीं पर भी 6 वर्ष से अधिक समय तक तैनात रहा हो उसकी दोबारा उसी जगह पोस्टिंग संभव नहीं है। हाई कोर्ट के आदेश के आलोक में वर्ष 2007 में विस्तृत शासनादेश जारी हुआ। 2007 के बाद ज्यादातर पोस्टिंग में शासनादेश का पालन हुआ लेकिन आबकारी मुख्यालय में तैनात रहे राजकुमार यादव जो सिपाही से क्लर्क और क्लर्क से इंस्पेक्टर तक पदोन्नति प्राप्त करते हुए 32 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज भी आबकारी मुख्यालय के कार्मिक में ही बने हुए हैं और उनका कभी भी ट्रांसफर नहीं किया गया इस मामले में शासनादेश का स्पष्ट उल्लंघन हुआ है लेकिन फिर भी आबकारी विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इसी तरह इंस्पेक्टर प्रसेन राय लगभग 15 वर्ष से एक ही पटल पर तैनात हैं उनका भी ट्रांसफर नहीं हुआ और शासनादेश का स्पष्ट उल्लंघन हो रहा है। इसी तरह इंस्पेक्टर के रूप में आबकारी विभाग मुख्यालय के कार्मिक में 8 वर्ष तक तैनात रहने के बावजूद दूसरी बार भी मुबारक अली की पोस्टिंग शासनादेश का उल्लंघन करते हुए कैसे हो गई इसकी जांच की जरूरत है और जिम्मेदार लोगों को दंडित करने की भी आवश्यकता है। बताया जा रहा है कि यह प्रकरण शासन में प्रमुख सचिव के सामने पहुंचा है और जल्द ही इस पर कार्यवाही की संभावना है।
यह अपने आप में भी हैरान करने वाली बात है कि अनियमितता और अराजकता के आरोप में मुबारक अली को कार्मिक से हटकर मुख्यालय में अटैच किया गया है लेकिन उन्हें अभी तक फील्ड में पोस्टिंग क्यों नहीं दी गई जबकि वह लखीमपुर खीरी स्थित गोविंद शुगर मिल डिस्टलरी में कागज पर सहायक आबकारी आयुक्त के रूप में फर्जी काउंटर साइन कर रहे हैं। प्रकरण बेहद गंभीर है लेकिन कार्रवाई न होना अपने आप में यह दिखा रहा है कि मुख्यालय में अराजकता की सीमा कहां तक पहुंच गई है। डिप्टी कार्मिक को भी इस अराजकता का जवाब देना ही होगा।




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