
प्रतापगढ़ में GST चोरी पर पर्दा क्यों? कार्रवाई होती है या सिर्फ कागजों में चल रहा खेल!
प्रतापगढ़।
जनपद में आटा, तेल, घी, सर्राफा, बालू-मौरंग समेत कई बड़े कारोबारी क्षेत्रों में GST चोरी के गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। ई-वे बिल से लेकर फर्जी बिलिंग और सरकारी विभागों की खरीद तक में बड़े खेल की चर्चा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब पारदर्शिता को लेकर उठ रहा है।
जहां अन्य विभागों की उपलब्धियां और कार्रवाई नियमित रूप से मीडिया के सामने रखी जाती हैं, वहीं GST विभाग की कार्रवाई का विस्तृत और पारदर्शी विवरण आखिर सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
सूचना विभाग हर विभाग की उपलब्धियां बताता है, फिर GST विभाग क्यों नहीं?
प्रतापगढ़ में सूचना विभाग समय-समय पर:
पुलिस कार्रवाई,
स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियां,
प्रशासनिक अभियान,
विकास कार्य,
छापेमारी,
सरकारी योजनाओं की प्रगति
जैसी सूचनाएं मीडिया तक पहुंचाता है।
लेकिन GST विभाग द्वारा:
कितनी छापेमारी हुई,
कितनी टैक्स चोरी पकड़ी गई,
कितनी वसूली हुई,
किन कारोबारियों पर कार्रवाई हुई,
कितने फर्जी ई-वे बिल पकड़े गए,
कितनी FIR दर्ज हुई,
इसका विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक रूप से शायद ही कभी सामने आता है।
आखिर कार्रवाई का पारदर्शी रिकॉर्ड क्यों नहीं जारी होता?
व्यापारिक और सामाजिक हलकों में कई सवाल उठ रहे हैं—
क्या कारण हो सकते हैं?
बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई छिपाई जाती है?
केवल कागजी कार्रवाई दिखाई जाती है?
विभागीय मिलीभगत की आशंका?
कार्रवाई की जानकारी दबाने का दबाव?
या फिर सिस्टम में पारदर्शिता की कमी?
यदि नियमित प्रेस ब्रीफिंग और सार्वजनिक रिपोर्ट जारी हो तो जनता को भी पता चले कि वास्तव में कितनी GST चोरी पकड़ी जा रही है।
ई-वे बिल में कैसे होता है खेल?
प्रतापगढ़ में विशेष रूप से बालू-मौरंग, खाद्यान्न और तेल कारोबार में ई-वे बिल को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
आरोपित तरीके:
कम मात्रा दिखाकर ज्यादा माल भेजना
एक ही ई-वे बिल पर कई ट्रिप
फर्जी फर्मों से बिलिंग
दूसरे जिले की फर्म से कागजी खरीद
वास्तविक कीमत से कम मूल्य दिखाना
सूत्रों का दावा है कि यदि परिवहन विभाग, खनन विभाग और GST रिकॉर्ड का मिलान कराया जाए तो बड़े खुलासे हो सकते हैं।
सरकारी विभागों की खरीद पर भी सवाल
सबसे गंभीर चर्चा सरकारी खरीद को लेकर है।
आरोप हैं कि कई मामलों में:
सप्लाई पूरी दिखा दी जाती है,
GST बिल लगाए जाते हैं,
लेकिन टैक्स वास्तविक रूप से जमा हुआ या नहीं इसकी प्रभावी जांच नहीं होती।
निर्माण कार्यों और सामग्री आपूर्ति में भी टैक्स चोरी की आशंका जताई जा रही है।
जनता पूछ रही — कितना टैक्स पकड़ा, कितना वसूला?
जनता और ईमानदार व्यापारियों का कहना है कि यदि विभाग वास्तव में सक्रिय है तो:
मासिक कार्रवाई रिपोर्ट,
जब्त माल का विवरण,
टैक्स रिकवरी,
फर्जी फर्मों की सूची,
ई-वे बिल जांच रिपोर्ट
सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
क्या होनी चाहिए व्यवस्था?
विशेषज्ञों और व्यापारिक संगठनों के अनुसार:
जरूरी कदम:
GST विभाग की मासिक प्रेस ब्रीफिंग अनिवार्य हो
सूचना विभाग के माध्यम से कार्रवाई सार्वजनिक हो
जिलेवार टैक्स चोरी रिपोर्ट जारी हो
ई-वे बिल और परिवहन डेटा का ऑनलाइन मिलान हो
सरकारी खरीद की थर्ड पार्टी ऑडिट हो
फर्जी ITC और फर्जी फर्मों पर सार्वजनिक कार्रवाई रिपोर्ट जारी हो
पारदर्शिता नहीं तो संदेह बढ़ेगा
जब कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक नहीं होगा तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रतापगढ़ में अब लोग पूछ रहे हैं कि: क्या GST चोरी पर सच में बड़ी कार्रवाई हो रही है, या केवल छोटे मामलों को दिखाकर बड़े नेटवर्क को बचाया जा रहा है?
अब नजर इस बात पर है कि GST विभाग और प्रशासन इस बढ़ते अविश्वास पर क्या जवाब देता है।




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