
लखनऊ, 27 फरवरी।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के फरवरी मासांत तक कर एवं करेत्तर राजस्व की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जीएसटी, वैट, स्टाम्प, परिवहन, खनन सहित सभी विभागों की समीक्षा हुई, लेकिन सबसे अधिक फोकस आबकारी विभाग के प्रदर्शन पर रहा।
लक्ष्य बड़ा, उपलब्धि कम
आबकारी विभाग को चालू वित्तीय वर्ष में ₹63,000 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था। फरवरी 2026 तक विभाग ₹48,501 करोड़ ही जुटा सका है। यानी वित्तीय वर्ष समाप्त होने में एक माह शेष रहते हुए विभाग अभी भी लगभग ₹14,500 से ₹15,000 करोड़ पीछे है।
हालांकि विभाग का दावा है कि पिछले वर्ष की तुलना में 13.2 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है, लेकिन सवाल यह है कि जब लक्ष्य से इतनी बड़ी दूरी बनी हुई है तो क्या यह वृद्धि पर्याप्त मानी जाए?
मार्च के भरोसे लक्ष्य?
विभाग ने मार्च माह में लगभग ₹9,050 करोड़ अतिरिक्त राजस्व जुटाने का रोडमैप प्रस्तुत किया है। दुकानों के 93.75% नवीनीकरण, लाइसेंस फीस, थोक एवं ब्रांड नवीनीकरण, अग्रिम मांग पत्र आदि के माध्यम से वर्षांत तक लगभग ₹57,550 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है।
लेकिन यदि यह अनुमान भी सही साबित होता है, तब भी लक्ष्य से लगभग ₹5,000 करोड़ की कमी रह सकती है। ऐसे में लक्ष्य प्राप्ति पर प्रश्नचिह्न बना हुआ है।
ओवर रेटिंग और प्रवर्तन पर सवाल
प्रदेश के विभिन्न जिलों से समय-समय पर ओवर रेटिंग, अवैध शराब बिक्री और प्रवर्तन में ढिलाई की शिकायतें सामने आती रही हैं। जानकारों का कहना है कि:
अधिक मूल्य वसूली की शिकायतों से वैध बिक्री प्रभावित होती है।
अवैध और समानांतर सप्लाई चैन राजस्व को नुकसान पहुंचाती है।
कुछ जिलों में कार्रवाई की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
ऐसे में चर्चा यह भी है कि क्या ओवर रेटिंग और प्रवर्तन की असमान स्थिति राजस्व लक्ष्य से पीछे रहने का कारण बनी?
इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कुछ अधिकारियों पर उच्च स्तर से अत्यधिक मेहरबानी के कारण जवाबदेही तय नहीं हो पा रही?
होली पर सख्ती के निर्देश
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिए हैं कि होली पर्व के दौरान अवैध और जहरीली शराब का निर्माण व बिक्री पूरी तरह रोकी जाए। उन्होंने सख्त निगरानी, संयुक्त छापेमारी अभियान और डिजिटल मॉनिटरिंग को और प्रभावी बनाने को कहा है।
जवाबदेही तय करने की जरूरत
प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था में आबकारी राजस्व एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। ऐसे में जब लक्ष्य और उपलब्धि के बीच बड़ा अंतर हो, तो केवल प्रतिशत वृद्धि का हवाला पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
मार्च की वसूली पर अब सबकी नजर है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग लक्ष्य के करीब पहुंच पाता है या नहीं, और यदि कमी रहती है तो इसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी किस स्तर पर तय की जाती है।




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