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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आबकारी की फुटकर दुकानों पर गन्ना विभाग के अधिकारियों का छापा, ओवर रेटिंग का दावा — उठे कई सवाल:

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आबकारी की फुटकर दुकानों पर गन्ना विभाग के अधिकारियों का छापा, ओवर रेटिंग का दावा — उठे कई सवाल
लखनऊ/पश्चिमी उत्तर प्रदेश। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में गन्ना विभाग के अधिकारियों द्वारा आबकारी की फुटकर शराब दुकानों पर छापेमारी किए जाने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि बिजनौर, संभल समेत कई जिलों में टीमों ने दुकानों पर पहुंचकर ओवर रेटिंग की शिकायतों की जांच की और कुछ स्थानों पर कार्रवाई का दावा भी किया गया है।
हालांकि इस कार्रवाई को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आबकारी विभाग की लाइसेंसी दुकानों पर गन्ना विभाग के अधिकारियों ने किस अधिकार और अनुमति के आधार पर छापेमारी की। सामान्यतः शराब दुकानों की जांच और कार्रवाई का अधिकार आबकारी विभाग और लाइसेंस प्राधिकारी के पास होता है।
सूत्रों के मुताबिक कई स्थानों पर छापेमारी के दौरान स्थानीय आबकारी अधिकारियों की मौजूदगी भी नहीं थी, जिससे प्रक्रिया की वैधानिकता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। नियमों के अनुसार किसी भी विभाग द्वारा दूसरे विभाग के लाइसेंस से संचालित प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई के लिए संबंधित प्राधिकारी की अनुमति और संयुक्त टीम का होना आवश्यक माना जाता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बिना लाइसेंस प्राधिकारी की अनुमति के की गई यह छापेमारी नियमों के अनुरूप है या नहीं। मामले को लेकर अभी तक आधिकारिक स्तर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

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