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कुर्सी को लेकर घमासान:

बीजेपी में शुरू हुआ सत्ता संग्राम:

नई दिल्ली। 29 मार्च को प्रधानमंत्री के नागपुर दौरे के बाद बीजेपी की अंदरूनी सियासत में उथल-पुथल मची हुई है। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए दो आदेश जारी हुए पहले यह कि वह 75 वर्ष पूरा होने से पहले अपना रिटायरमेंट प्लान घोषित करें और दूसरा यह कि भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ करेगा। यह भी कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक और कार्यकाल के लिए अवसर देने से साफ मना कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नागपुर से दिल्ली आए लेकिन उनके चेहरे पर निराशा और थकान के भाव देखे गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भविष्य को लेकर कितने चिंतित हैं इसको इसी बात से समझा जा सकता है कि लोकसभा और राज्यसभा में ऐतिहासिक वक्फ बिल  संशोधन को लेकर चर्चा की अगवाई उनकी जगह गृह मंत्री अमित शाह ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में रहते हुए भी लोकसभा से दूर रहे इसको लेकर तरह-तरह की अटकलें हैं। कुछ लोगों का मानना है कि वह मानसिक रूप से सितंबर में रिटायर होने की तैयारी कर रहे हैं इसीलिए अब वह तमाम मुद्दों में अपने को इंवॉल्व नहीं कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं को अमित शाह के संरक्षण में ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं। उनकी योजना है कि उनके रिटायरमेंट के बाद अमित शाह ताकतवर बन रहे इसीलिए वह अमित शाह को इस समय आगे कर चुके हैं। दूसरी और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जल्द ही भारतीय जनता पार्टी के नए अध्यक्ष का ऐलान कर सकती है। संकेत से स्पष्ट है कि जो अध्यक्ष होगा वह अमित शाह और नरेंद्र मोदी का नजदीकी नहीं होगा बल्कि संघ के प्रति वफादार होगा।

संघ ने इस बात के भी संकेत दिए हैं कि मौजूदा प्रधानमंत्री के कार्यकाल में ही एक डेप्युटी प्राइम मिनिस्टर भी दिया जाएगा जो भविष्य का प्रधानमंत्री हो सकता है। वह चेहरा कौन होगा फिलहाल इस पर मंथन जारी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस बात पर भी विचार कर रहा है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री एक ही राज्य से आने के कारण देश की राजनीतिक ताकत गुजरात तक सीमित रह गई है और इसे विकेंद्रित करने की आवश्यकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि गुजरात की यह राजनीतिक ताकत छीनकर किसी और राज्य महाराष्ट्र मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में जा सकती है। भविष्य की राजनीति के तहत यह भी कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री महाराष्ट्र से हो और गृह मंत्री उत्तर प्रदेश से हो जिससे महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक की राजनीति को संतुलित किया जा सके। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस कवायत में सबसे ज्यादा बेचैन अमित शाह है। उनकी बेचैनी की वजह यह है कि नरेंद्र मोदी तो प्रधानमंत्री के पद से रिटायर हो जाएंगे और नियमानुसार उनके पास भूतपूर्व प्रधानमंत्री के रूप में तमाम सुरक्षा और संरक्षण होगी लेकिन गृह मंत्री अमित शाह जो अपने पूरे कार्यकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को चुनौती देते रहे उनका राजनीतिक भविष्य पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगा क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं करता है। ऐसी स्थिति में अमित शाह राष्ट्रीय राजनीति में अपना स्थान बनाने के लिए इस समय संघर्ष कर रहे हैं। हाल फिलहाल अगले एक या दो महीने में बीजेपी का सत्ता संग्राम चरम पर होगा।

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