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आबकारी विभाग में पदोन्नति पर उठा विवाद: ‘लिफाफा तंत्र’ ने बढ़ाई बेचैनी

लखनऊ।
आबकारी विभाग में इंस्पेक्टर से सहायक आबकारी आयुक्त, सहायक आबकारी आयुक्त से डिप्टी और डिप्टी से जॉइंट आबकारी आयुक्त पदों पर विभागीय प्रोन्नति प्रक्रिया शुरू होते ही नए विवाद ने जोर पकड़ लिया है। विभागीय गलियारों में चर्चाएं तेज हैं कि प्रोन्नति में पारदर्शिता के बजाय ‘लिफाफा तंत्र’ काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक 2 सितंबर को डीपीसी की प्रक्रिया शुरू होगी। पहले चरण में इंस्पेक्टर से एक के लिए यह विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होगी।

लिफाफे का खेल

  • चर्चाओं के मुताबिक “जिसका लिफाफा मिला, उसका लिफाफा खोल दिया गया, और जो देने में असमर्थ रहे, उनका लिफाफा बंद कर दिया गया।”
  • इस तरह की बातें अब खुले तौर पर विभागीय बैठकों और कर्मचारियों के बीच गूंज रही हैं।

नियमों का उल्लंघन

  • सेवा नियमों के मुताबिक किसी भी सुनवाई प्रकरण को 90 दिनों में निपटाना अनिवार्य है।
  • हकीकत यह है कि कई प्रकरण प्रमुख सचिव स्तर पर नौ-नौ महीने तक लंबित रखे गए।
  • इससे न केवल पदोन्नति प्रभावित हुई है बल्कि वरिष्ठता सूची भी विवादों में फंस गई है।

संदेह की दो वजहें

लंबी देरी को लेकर दो तरह की बातें सामने आ रही हैं—

  1. सुनवाई की आड़ में वसूली के गंभीर आरोप
  2. कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों को जानबूझकर दंडित करने के लिए प्रकरण टालना

कर्मचारियों में गहरी नाराजगी

  • विभागीय कर्मियों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो योग्यता और वरिष्ठता के बजाय ‘लिफाफा’ ही पदोन्नति तय करेगा।
  • इससे विभाग की साख और ईमानदार अधिकारियों का मनोबल बुरी तरह प्रभावित होगा।

अब निगाहें शासन पर

सवाल उठ रहा है कि शासन और विभाग इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए क्या कदम उठाएंगे। क्या पदोन्नति विवाद और अविश्वास की भेंट चढ़ेगी, या फिर सरकार सख्ती दिखाकर कर्मचारियों का विश्वास बहाल करेगी?


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