
आरटीआई से खुलासा: आबकारी निरीक्षक शैलेंद्र तिवारी का वेतन घोटाला, पे मेमो न होने के बावजूद जारी हुआ वेतन
सहारनपुर/प्रयागराज। आबकारी विभाग में कार्यरत निरीक्षक शैलेंद्र तिवारी पर गंभीर आरोपों का नया खुलासा हुआ है। एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के तहत मिले दस्तावेज़ में यह सामने आया है कि सहारनपुर प्रवर्तन दो में तैनाती के दौरान उन्होंने पूरे 11 महीने तक बिना पे मेमो जारी हुए वेतन उठाया।
आरटीआई से बड़ा खुलासा
आरटीआई के जवाब में सहारनपुर प्रवर्तन कार्यालय ने स्वयं स्वीकार किया है कि मुख्यालय से वेतन आहरण हेतु पे मेमो जारी ही नहीं किया गया था। इसके बावजूद माह जुलाई 2023 से जून 2024 तक का वेतन सीधे जिला आबकारी अधिकारी सहारनपुर द्वारा कार्यालय स्तर से निर्गत कर दिया गया।
यह तथ्य विभागीय नियमों के पूरी तरह खिलाफ है, क्योंकि वेतन आहरण की वैधता का आधार केवल पे मेमो होता है।
पे मेमो का महत्व और नियमों की अनदेखी
विशेषज्ञ बताते हैं कि पे मेमो ही आधिकारिक प्रमाण होता है कि संबंधित कर्मचारी ने वास्तव में कार्य किया है। यदि पे मेमो जारी नहीं हुआ, तो इसका सीधा मतलब यह है कि उक्त अवधि में शैलेंद्र तिवारी ने कोई कार्य नहीं किया।
प्रयागराज में वर्तमान पोस्टिंग और संलिप्तता
वर्तमान में आबकारी निरीक्षक शैलेंद्र तिवारी प्रभारी थोक अनुज्ञापन प्रयागराज के पद पर तैनात हैं। उन पर आरोप है कि वह इस पूरे षड्यंत्र में सीधे तौर पर शामिल रहे और उन्होंने जानबूझकर बिना पे मेमो वेतन उठाया।
कानूनी पहलू और जवाबदेही
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार —
- यह प्रकरण वित्तीय नियमावली और सरकारी सेवक आचरण नियमावली का उल्लंघन है।
- इसमें वेतन की रिकवरी और अनुशासनात्मक कार्रवाई दोनों आवश्यक हैं।
- यदि जांच में षड्यंत्र और पद के दुरुपयोग का दोष सिद्ध होता है तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भी मामला दर्ज किया जा सकता है।
कार्रवाई की मांग
अब सवाल उठता है कि जब पे मेमो जारी ही नहीं हुआ तो सहारनपुर प्रवर्तन कार्यालय ने वेतन कैसे जारी कर दिया?
इस घोटाले ने विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बना दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि शैलेंद्र तिवारी द्वारा उठाए गए 11 माह के वेतन की रिकवरी तत्काल होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर जांच कर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।




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