
लखनऊ. कानपुर देहात स्थित आरती डिस्टलरी में नियमों को तक पर रखकर जिस तरह से उत्पादन क्षमता बढ़ाया गया है उसमें करोड़ों रुपए का खेल हुआ है। बताया जा रहा है कि डिस्टलरी की कुल उत्पादन क्षमता 437 लाख बल्क किलो लीटर से अधिक है जिसमें 20 से 30% उत्पादन क्षमता की डिस्टलरी के डिमांड को मंजूर कर लिया गया। इसमें बड़ा खेल हुआ है। इस खेल की वजह से आबकारी विभाग को करोड़ों के राजस्व की क्षति हुई है। नियमानुसार यदि डिस्टलरी की उत्पादन क्षमता बढ़ाई जाती तो जितना उत्पादन क्षमता बढ़ता उतना ही कम से कम 50000 रुपए प्रति बल्क लीटर लाइसेंस फीस और एक्साइज ड्यूटी वसूली जाती। तकनीकी विभाग ने नियमानुसार उत्पादन क्षमता नहीं बढ़ाया बल्कि डिस्टलरी की डिमांड पर ही उत्पादन क्षमता में वृद्धि कर दी।
आबकारी विभाग को राजस्व क्षति कैसे हुई;
आरती डिस्टलरी की मनमानी ढंग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने से आबकारी विभाग को करोड़ों रुपए के राजस्व की क्षति होने लगी। यह सब जानबूझकर किया गया। एक हनुमान के मुताबिक लगभग 13 लाख ब्लाक किलोलीटर पर नियमानुसार 50000 रुपये प्रति बल्क किलो लीटर लाइसेंस फीस और उत्पादन फीस की विभाग ने वसूली ही नहीं की जिसकी वजह से आबकारी विभाग को कई सौ करोड रुपए का घाटा हुआ जबकि आरती डिस्टलरी को कई सौ करोड रुपए का फायदा हुआ। यह फायदा जानबूझकर पहुंचाया गया है।
अरबो रुपए की पेनल्टी से बचने के लिए किया गया खेल;
बिना किसी सर्वे रिपोर्ट और सक्षम तकनीकी अधिकारी की निरीक्षण रिपोर्ट के बगैर आरती डिस्टलरी की उत्पादन क्षमता करीब 1 करोड़ 31 लाख बल्क लीटर तक बढ़ा दी गई। जानकारों का मानना है कि अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक ईएनए उत्पादन करके डिस्टलरी दंड की भागीदार थी और उसे अधिक उत्पादन पर प्रति ब्लाक किलो लीटर कई सौ करोड रुपए का भुगतान करना था और इसी पेनल्टी से बचने के लिए कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए खेल किया जिसको विभाग के बड़े अधिकारी ने मंजूर कर लिया और करोड़ों का खेल हो गया।
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