कई डिस्टलरी और इंडियन ऑयल डिपो को बन चुका है निशाना:
हर महीने हो रही 30 से 40 लख रुपए तक की वसूली:

लखनऊ। अमृतके आश्रित कोटे में फर्जी ढंग से नियुक्ति पाने वाला अनिल यादव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में डिस्टलरी और इंडियन ऑयल के डिपो इसकी अवैध वसूली से परेशान है। बिना उच्च अधिकारियों के संज्ञान में ही यह तमाम डिपो के लिए कारण बताओं नोटिस जारी कर देता है और इसी तरह डिस्टलरी में भी यही खेल चल रहा है। जब डिस्टलरी के लोग यहां प्राविधिक विभाग में संपर्क करते हैं तो बिना किसी तकनीकी योग्यता के कमिश्नर की कृपा से प्राविधिक अधिकारी बने मोडवेल पीड़ित कंपनियों को अनिल यादव से मिलने की सलाह देते हैं और अनिल यादव उच्च अधिकारियों के नाम पर अच्छी खासी रकम वसूल लेता है उसके बाद आपत्तियों को निस्तारित कर देता है या खेल काफी समय से चल रहा है और अब इसकी शिकायतें मंत्री और शासन तक पहुंचने लगी है। इस खेल में अवैध रूप से आबकारी निरीक्षक से तकनीकी प्रभारी अधिकारी बने संदीप मोडवेल भी शामिल है। या जो रकम वसूली जा रही है क्या इसका हिस्सा उच्च अधिकारियों को भी मिल रहा है फिलहाल इसकी पुष्टि तभी होगी जब इस मामले की जांच हो।
यह भी चर्चा जोर पकड़ रही है कि तकनीकी विभाग में बतौर लिपिक कार्यरत अनिल यादव की नियुक्ति ही अवैध है। विभाग में आम चर्चा है कि अनिल यादव के पिता की मौत नहीं हुई थी बल्कि अनिल यादव ने अपने पिता की फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाई है। फिलहाल यह प्रकरण गंभीर है लेकिन आबकारी अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं।




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