
लखनऊ। तकनीकी विभाग द्वारा विभिन्न डिस्टलरी के लिए खरीदे जाने वाले अल्कोहल मीटर की खरीद में बड़ा खेल कर दिया है। मिली जानकारी के मुताबिक खुले बाजार में जो अल्कोहल मीटर एंटन पार कंपनी द्वारा मात्र ₹300000 में बेचा गया वही अल्कोहल मीटर आबकारी विभाग ने लगभग ₹600000 में खरीदा। बताया जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं की गई और एंटन पार ने ही अपनी ही अलग-अलग कंपनी को पार्टिसिपेट कराया और कुल तीन कंपनियां ही टेंडर में भाग ले सकी। ऐसे में सवाल उठता है कि लगभग 55 अल्कोहल मीटर के लिए अगर टेंडर ऑनलाइन कराया गया था तो सिर्फ तीन कंपनियां ही पार्टिसिपेट क्यों की और इसमें भी जिस कंपनी को चयनित किया गया उसके द्वारा पूर्व में जो अल्कोहल मीटर की आपूर्ति की गई है उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। कहां जा रहा है कि अल्कोहल मीटर की रीडिंग संतोष जनक नहीं है। बताया जाता है कि अल्कोहल में डिग्री की रीडिंग में चूक हो जाती है। कुल मिलाकर यह अल्कोहल मीटर कनाडा चीन ब्राजील जापान जैसे ठंडे प्रदेशों की रिजेक्ट अल्कोहल मीटर है जो स्क्रैप के रूप में एंटन पार कंपनी द्वारा खरीद कर डिस्टलरी को महंगे दाम पर बेचा जा रहा है जबकि इस अल्कोहल मीटर को भारतीय जल विभाग के परिपेक्ष में अद्यतन नहीं किया गया है।
फर्जी प्राविधिक अधिकारी मोडवेळ का कारनामा:
बताया जा रहा है कि नॉन टेक्निकल सहायक आबकारी आयुक्त संदीप मोडवेळ को जानबूझकर अवैध रूप से कमिश्नर द्वारा प्राविधिक अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है जिससे कि इस तरह के अवैध सौदेबाजी में किसी प्रकार की एनओसी प्राप्त करने में दिक्कत ना हो। वास्तव में इस खरीद प्रक्रिया की जांच होनी चाहिए क्योंकि इस खरीद की मंजूरी एक नॉन टेक्निकल सहायक आबकारी आयुक्त द्वारा दी गई है जो कि अवैध है और इसमें बड़े घोटाले की साजिश की बू रही है।




More Stories
आरटीआई में बड़ा खुलासा: टपरी शराब घोटाले की शपथपत्र पर शिकायत, SIT रिपोर्ट और 20 करोड़ के आरोप—फिर भी प्रमुख सचिव आबकारी खामोश:
कुर्सी कांड से उठा सियासी तूफान, मंत्री नितिन अग्रवाल की सूझबूझ से टला बड़ा विवाद: भाजपा विधायक योगेश वर्मा के अपमान पर भड़के हालात, अधिकारियों की लापरवाही आई
आबकारी विभाग की निरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल, स्वतंत्र जांच की उठी मांग: प्रथम निरीक्षण के रिकॉर्ड और पक्के मुआयने में विरोधाभास की चर्चा: