
लखनऊ। एक तरफ विभागीय मंत्री नितिन अग्रवाल देश दुनिया के निवेशकों को उत्तर प्रदेश के लेकर इंडस्ट्री में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग के प्राविधिक में तैनात नॉन टेक्निकल भ्रष्ट अधिकारी बड़े निवेश के लिए बड़े स्पीड ब्रेकर साबित हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि अवैध रूप से तथाकथित वरिष्ठ प्राविधिक अधिकारी के रूप में तैनात इस सहायक आबकारी आयुक्त संदीप मोडवेळ और फर्जी तरीके से चपरासी से लिपिक के रूप में पदोन्नति पाने वाले अनिल यादव की वसूली और शोषण के चलते कई बड़ी शराब कंपनियों ने यूपी में निवेश का इरादा ही टाल दिया है। अब यह जानकारी मिली है कि pd 33 स्तर पर कई डिस्टलरी की पत्रावली लंबित है और इसलिए आगे नहीं बढ़ पा रही है क्योंकि उनसे कथित रूप से बड़ी रकम वसूली जा रही है। यह भी खबर आ रही है कि मध्य प्रदेश की एक बड़ी शराब कंपनी महाकौशल ग्रुप जो प्रयागराज के करछना क्षेत्र में डिस्टलरी खोलने के लिए काफी आगे बढ़ गई थी अब शोषण और वसूली के चलते उत्तर प्रदेश के बजाय झारखंड या छत्तीसगढ़ की ओर जाना चाहते हैं और अपना लाइसेंस समर्पित करना चाहते हैं या किसी और को दे देना चाहते हैं सच्चाई जो भी हो फिलहाल उनकी पत्रावली तकनीकी विभाग में धूल फांक रही है । इसी तरह उत्तर प्रदेश की एक बड़ी चीनी मिल और डिस्टलरी ने केन सिरप से जुड़े हजारों करोड़ के निवेश प्रस्ताव विभाग की एक बड़े अधिकारी द्वारा ठुकरा दिए जाने के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश का अपना इरादा ही छोड़ दिया। कुल मिलाकर तकनीकी विभाग की अड़ंगेबाजी और भ्रष्टाचार के चलते आबकारी मंत्री के बड़े प्रयासों से जो पूंजी निवेश होने वाला था उस पर पलीता लगता दिखाई दे रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह तकनीकी विभाग में अवैध और गैर जिम्मेदार नियुक्तियां हैं। सुनने में आ रहा है कि कल विभागीय मंत्री नितिन अग्रवाल आबकारी में निवेश प्रस्ताव की स्थिति की समीक्षा करने वाले हैं देखना है कि इन मुद्दों पर ध्यान जाता है या नहीं।




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