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लखनऊ में ड्राई डे यानी 15 अगस्त पर धड़ल्ले से बेची गई लाखों रुपए की अवैध शराब: कमिश्नर के लाडले डीईओ सुशील कुमार मिश्रा की करतूत

लखनऊ। जिला आबकारी अधिकारी सुशील मिश्रा सोते रहे और लखनऊ जिले में ड्राई डे यानी 15 अगस्त पर लाखों रुपए की अवैध शराब बिक गई। भला हो उत्तर प्रदेश पुलिस की सक्रियता का जिसने समय रहते कुछ शराब तस्करों को दबोच लिया। आबकारी विभाग की लापरवाही से बहुत बड़ी घटना भी हो सकती थी चाची अवैध शराब घटिया गुणवत्ता और जानलेवा भी हो सकती थी।

मिली जानकारी के मुताबिक लगभग 5 पेटी अवैध शराब के साथ महिला गिरफ्तार हुई है जबकि उसका एक साथी भागने में कामयाब हो गया

15 अगस्त को लाइसेंसी ठेके बंद होने के चलते अवैध रूप से दिन भर शराब बिक्री जारी रही और शराब तस्करों ने लगभग दोगुने दाम पर शराब बेचकर मोटा मुनाफा कमाया।

सरकार जहां एक और आजादी के अमृत महोत्सव मान रही है वहीं शराब माफियाओं ने भी इसे भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी आजादी के अमृत महोत्सव के तहत स्वाधीनता दिवस पर शराब माफियाओं ने खुलेआम देसी शराब परोस कर जबरदस्त मुनाफा कमाया।

जानकार सूत्रों के मुताबिक मोहनलालगंज थाने के भागू खेड़ा चौकी से चंद कदमों की दूरी पर स्थित ठेके के पास शराब तस्कर खुलेआम शराब बेचते रहे जिसकी सूचना जिला आबकारी अधिकारी को भी होती मिलती रही बावजूद इसके किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। हैरानी की बात है कि जॉइंट कमिश्नर एके राय जिन्हें टास्क फोर्स की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है उनके स्तर पर भी इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई। कहां जा रहा है कि अवैध शराब की तस्करी करने वाले लोग जिला आबकारी अधिकारी सुशील मिश्रा और डिप्टी के करीबी हैं।

जिस अतुल द्विवेदी पर लखनऊ में खुलेआम अवैध तरीके से शराब बेचने आरोप लगा है उसे जिला आबकारी अधिकारी का भी कथित रूप से वरदहस्त प्राप्त है । मिली जानकारी के मुताबिक उसने करीब 15 पेटी से ज्यादा शराब बेची ।

आरोप इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अतुल द्विवेदी पर कथित रूप से भागू खेड़ा से सिसेंडी मार्ग पर स्थित देशी शराब ठेका से निकाल कर दारू बेची ।

इतना ही नहीं शराब माफिया ने ठेके के सामने खुलेआम रोड पर देशी शराब बेची इसकी सूचना भी विभिन्न माध्यमों से अधिकारियों तक पहुंची लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई।

₹150 प्रति क्वार्टर की दर से माफिया ने बेची देसी शराब

सूत्रों ने दावा किया है कि उक्त माफिया ने 150 रुपए प्रति क्वार्टर के दर से देसी शराब बेची लेकिन उस पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई। तथाकथित रूप से उक्त शराब माफिया को यह भी कहते हुए सुना गया कि आबकारी महकमे के बड़े साहब उसके खास हैं।

उसे यह भी कहते हुए सुना गया कि लाइसेंसी दुकानों से 8 से 10 किलोमीटर की दूरी तक उसका सिक्का चलता है।

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