विभाग होगा मालामाल: लाइसेंसी हो जाएंगे कंगाल:

लखनऊ। आबकारी विभाग ने अपनी नई पॉलिसी में ऐसा महीन जाल बुना है जिसमें फंसकर लाइसेंसी तड़प तड़प कर दम तोड़ देंगे। आबकारी विभाग का तो खजाना भर जाएगा लेकिन लाइसेंसी कंगाल हो जाएंगे और हो सकता है उन्हें अपना दुकान मकान सब बेचना पड़ जाए।
ऐसा हम क्यों कह रहे हैं आइए नई पॉलिसी के हिसाब से ही इसको समझते हैं। आबकारी विभाग की नई पॉलिसी के अनुसार यदि लाइसेंसी देसी शराब का एक पव्वा बेचता है तो उसे मात्र 7 रुपए मिलेंगे लेकिन यदि यही पव्वा नहीं बिक पता है तो उसे 79 रुपए अपनी जेब से एक्साइज ड्यूटी लाइसेंस फीस के रूप में भरना होगा। बता दें कि सभी लाइसेंसी दुकान का कोटा विभाग तय करता है और कोटा हर हाल में उठना पड़ता है। कोटा हर महीने तय होता है और निर्धारित कोटा हर हाल में उठाना पड़ता है ऐसे में यदि कोई शराब नहीं बिक पाती है तो बच गई शराब का एक्साइज ड्यूटी और लाइसेंस फीस विभाग को भरना पड़ेगा। उदाहरण के लिए मान लीजिए देसी शराब में मंथली कोटा 1200 लीटर का है और महीने में मात्र 900 लीटर ही बिक पाया तो बचे हुए 300 लीटर पर लगभग 105000 रुपया अपनी जेब से भरना पड़ेगा और बचा हुआ माल विभाग नष्ट भी कर देगा। विभाग की गणित से अगर देखा जाए तो अगर पूरा कोटा यानी 1200 लीटर शराब बिक जाती है तो लाइसेंसी को मात्र 36000 रुपया ही फायदा होगा। इस गणित से विभाग को और डिक्शनरी और गोदाम को कोई नुकसान नहीं है क्योंकि उनके लिए कोई कोटा निर्धारित नहीं किया गया है ऐसे में फुटकर लाइसेंसी ही बर्बाद होंगे।
आबकारी विभाग द्वारा रिटेलर की मार्जिन के लिए जो मूल्य सारणी निर्धारित की गई है वह इस प्रकार है:





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