भर गई आबकारी विभाग की तिजोरी:

लखनऊ। आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल की दुकानों के लॉटरी के जरिए व्यवस्थापन करने की जिद से आबकारी विभाग की तिजोरी भर गई। यह अलग बात है कि उनके प्रयास को उन्हीं के विभाग के प्रमुख सचिव और कमिश्नर विफल करने की पूरी कोशिश करते रहे। सहयोग का आलम तो यह था कि एक समय मंत्री ही अलग-अलग पड़ गए थे लेकिन उन्होंने आबकारी विभाग के प्रमुख अधिकारियों द्वारा दुकानों के नवीनीकरण संबंधी किसी दलील को मानने से इनकार कर दिया बिबास होकर आबकारी विभाग को देसी और विदेशी मदिरा की सभी दुकानों कब व्यवस्थापन लॉटरी के जरिए करने पर विवश होना पड़ा। पहली बार उत्तर प्रदेश में कंपोजिट दुकानों का कॉन्सेप्ट भी मंत्री की देन है और बता दें कि इस कॉन्सेप्ट की वजह से आबकारी विभाग का खजाना भर गया।
लखनऊ
यूपी आबकारी विभाग ने राजस्व लक्ष्य में कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। आबकारी इतिहास में अब तक की सबसे अधिक शराब बिक्री का रिकॉर्ड भी 2024 25 को ही माना जा रहा है। 2024 – 25 में ₹52297 करोड़ से ज्यादा का राजस्व हासिल हुआ जो 2023- 24 के मुकाबले 6726 करोड रुपए ज्यादा है। वित्तीय वर्ष 2023 – 24 में 45570 करोड़ से ज्यादा रेवेन्यू प्राप्त हुआ था जबकि 2022-23 में मात्र 412 252 का ही राजस्व प्राप्त हुआ:
6 वर्षों तक लॉटरी ना होने से विभाग को कम से कम 15000 करोड़ का हुआ नुकसान:
जानकारों का मानना है कि आबकारी विभाग के अधिकांश अधिकारी शराब माफियाओं के लिए काम करते रहे हैं जिसकी वजह से दुकानों काव्य व्यवस्थापन लॉटरी के जरिए करने के बजाय नवीनीकरण पर जोर देते थे और प्रति दुकान 50 से ₹60000 लेकर अपनी तिजोरी तो भर लेते थे लेकिन विभाग की तिजोरी खाली ही रहती थी ऐसे में लंदन के स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से पढ़कर विभाग के कमान संभालने वाले मंत्री के सामने विभाग के अधिकारियों की एक नहीं चली और पहली बार विभाग के अधिकारियों की तिजोरी खाली रह गई और विभाग की तिजोरी भर गई। स्टेटिक के एक बड़े जानकारी ने बताया कि जिस तरह से इस बार लॉटरी के जरिए करीब 7000 करोड रुपए का फायदा हुआ यदि 2018 से अनवरत लॉटरी के जरिए दुकानों का व्यवस्थापन हो रहा होता तो कम से कम 15000 करोड़ रूपया विभाग के पास और आ जाते।
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