
लखनऊ। आबकारी विभाग की पॉलिसी का हाई कोर्ट ट्रायल करेगा और इस बात की चर्चा हो रही है कि आबकारी पॉलिसी रद्द भी हो सकती है। जानकारों का मानना है कि आबकारी विभाग ने आबकारी एक्ट में ही उल्लंघन कर दिया है जिसकी वजह से पॉलिसी रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है।
कहां हुई आबकारी विभाग से गलती:
जानकारों का मानना है कि आबकारी विभाग ने बिना किसी सर्वे के और बिना गजट प्रकाशित किए आबकारी पॉलिसी की लॉटरी में कंपोजिट दुकानों का प्रावधान कर दिया जबकि यह अधिकार ना तो आबकारी विभाग के प्रमुख सचिव को है और ना ही कमिश्नर को। जानकारों का मानना है कि यह आबकारी अधिनियम 1910 का भी उल्लंघन है। नियम के मुताबिक किसी दुकान का अस्तित्व समाप्त कर उसको अन्य दुकान में मर्ज करने के लिए आबकारी विभाग को पॉलिसी लाने से पहले अखबारों में गजट करना था और उसे पर आने वाली आपत्तियों का निस्तारण करना था उसके बाद ही पॉलिसी लाना था लेकिन विभाग ने ऐसा कुछ नहीं किया और मूर्ख अधिकारियों की सलाह पर आबकारी नीति घोषित कर दी गई। इस प्रकरण में प्रमुख सचिव और कमिश्नर की मूर्खता और अयोग्यता जग जाहिर हो गई अब कहा जा रहा है कि 15 मार्च के बाद आबकारी विभाग इस प्रकरण पर यदि संतोष जनक जवाब नहीं देता तो पूरी आबकारी नीति भी रद्द हो सकती है।




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