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टपरी डिस्टलरी अवैध शराब कांडचार्जशीट (Charge Sheet – Based on SIT Findings & Governance Correspondence)

 
SIT ने पर्यवेक्षक अधिकारियों की विफलता पर सवाल उठाए, शासन का पत्र आया—लेकिन विभाग मौन रहा
टपरी डिस्टलरी कांड की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने केवल अवैध शराब की आपूर्ति तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पर्यवेक्षक दायित्व (Supervisory Responsibility) निभाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सीधे सवाल खड़े किए थे।
SIT का स्पष्ट निष्कर्ष
SIT ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया कि—
अवैध शराब का यह नेटवर्क
बिना क्षेत्रीय डिप्टी एक्साइज कमिश्नर,
जॉइंट एक्साइज कमिश्नर,
और उच्च स्तर के पर्यवेक्षण के
लंबे समय तक चल ही नहीं सकता था।
यानी, SIT के अनुसार यह मामला:
“केवल फील्ड लेवल की चूक नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों की पर्यवेक्षणीय विफलता और संरक्षण का परिणाम” था।
शासन का पत्र: कार्रवाई पूछी गई, जवाब नहीं मिला
SIT की रिपोर्ट के आधार पर:
शासन स्तर से आबकारी विभाग को औपचारिक पत्र भेजा गया
पत्र में स्पष्ट रूप से पूछा गया:
SIT द्वारा चिन्हित
पर्यवेक्षक दायित्व में विफल अधिकारियों
के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई?
हैरान करने वाला तथ्य
इस पत्र को वर्षों बीत चुके हैं
लेकिन:
न तो कोई लिखित जवाब शासन को भेजा गया
न कोई कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक की गई
न ही किसी अधिकारी पर विभागीय दंड लगाया गया
➡️ शासन के सवाल पर विभाग की यह चुप्पी अब खुद संदेह के घेरे में आ चुकी है।
कार्रवाई के बजाय इनाम: पूरा विभागीय रिकॉर्ड उलटा
जहां एक ओर:
शासन जवाब मांगता रहा
SIT दोष तय करती रही
वहीं दूसरी ओर:
घोटाले में संदिग्ध और दोषी भूमिका वाले अधिकारियों को:
पदोन्नति दी गई
लखनऊ, मेरठ, EIB जैसे मलाईदार और रणनीतिक पद सौंपे गए
कुछ को ससम्मान सेवानिवृत्ति का रास्ता दिखाया गया
सिस्टम का खतरनाक संदेश
“घोटाले में नाम आएगा तो डरने की जरूरत नहीं,
बल्कि प्रमोशन तय है।”
सबसे गंभीर सवाल
❓ जब शासन ने पूछा कि कार्रवाई क्या हुई, तो विभाग ने जवाब क्यों नहीं दिया?
❓ क्या शासन के पत्र को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
❓ क्या पदोन्नतियां इसी शर्त पर दी गईं कि कोई अधिकारी मुंह नहीं खोलेगा?
❓ क्या यह केवल लापरवाही है या सुनियोजित संरक्षण?
निष्कर्ष
टपरी डिस्टलरी कांड अब:
अवैध शराब का मामला नहीं
बल्कि शासन बनाम विभाग,
जवाबदेही बनाम संरक्षण,
और कानून बनाम सिस्टम की लड़ाई बन चुका है।
SIT ने दोष बताया,
शासन ने सवाल पूछा,
लेकिन आबकारी विभाग ने जवाब देने के बजाय
दोषियों को इनाम दे दिया।


टपरी डिस्टलरी अवैध शराब कांड
चार्जशीट (Charge Sheet – Based on SIT Findings & Governance Correspondence)
चार्जशीट संख्या – 01
आरोपी अधिकारी : दिलीप मणि त्रिपाठी
पद:
तत्कालीन: डिप्टी एक्साइज कमिश्नर (वाराणसी परिक्षेत्र / देवीपाटन मंडल)
वर्तमान: जॉइंट एक्साइज कमिश्नर (मेरठ / लखनऊ), ईआईबी प्रभारी
आरोप
चार्ज–1 : टपरी डिस्टलरी से अवैध शराब की सुनियोजित बिक्री
वर्ष 2019–20 में
सहारनपुर स्थित टपरी डिस्टलरी से
बिना ड्यूटी पैड एवं वैध परिवहन प्रपत्र
CL-2 लाइसेंस के माध्यम से जौनपुर जनपद में करोड़ों रुपये की शराब बिक्री
जिला आबकारी अधिकारी घनश्याम मिश्रा के साथ समन्वय/मिलीभगत
चार्ज–2 : पर्यवेक्षक दायित्व में घोर विफलता
डिप्टी एक्साइज कमिश्नर होने के नाते
अपने डिवीजन में अवैध शराब की आपूर्ति को
रोकने में पूर्ण विफलता
SIT द्वारा इसे Supervisory Failure माना गया
चार्ज–3 : देवीपाटन मंडल में ENA घोटाला
स्टार लाइट ब्रुअरी/डिस्टलरी को
नियम विरुद्ध 58,000 लीटर ENA
ऑफलाइन परमिट पर आयात की अनुमति
ENA का बाद में गायब हो जाना
राज्य को करोड़ों रुपये की क्षति
चार्ज–4 : SIT दोष सिद्ध होने के बावजूद अनुचित पदोन्नति
SIT द्वारा दोषी/संदिग्ध पाए जाने के बावजूद
पदोन्नति
EIB, लखनऊ, मेरठ जैसे संवेदनशील व मलाईदार पदों पर तैनाती
चार्जशीट संख्या – 02
आरोपी अधिकारी : सुशील कुमार मिश्रा
पद: तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी, बदायूं
आरोप
चार्ज–1 : टपरी डिस्टलरी की अवैध शराब का सर्वाधिक उपभोग जिला
SIT जांच में पाया गया कि
बदायूं जनपद में
टपरी डिस्टलरी से 15 ट्रक अवैध शराब बेची गई
जो प्रदेश में सर्वाधिक थी
चार्ज–2 : सक्रिय भूमिका एवं संरक्षण
बिना जिला आबकारी अधिकारी की जानकारी/संलिप्तता
इतनी बड़ी मात्रा में शराब की बिक्री असंभव
SIT द्वारा भूमिका को दोषपूर्ण माना गया
चार्ज–3 : राजस्व हानि
राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का आबकारी नुकसान
न वसूली, न जवाबदेही
चार्जशीट संख्या – 03
आरोपी अधिकारी : जैनेंद्र उपाध्याय
पद:
तत्कालीन: डिप्टी एक्साइज कमिश्नर
सेवानिवृत्त: जॉइंट एक्साइज कमिश्नर (EIB)
आरोप
चार्ज–1 : उन्नाव जनपद में अवैध शराब बिक्री
टपरी डिस्टलरी से
उन्नाव जनपद में
करोड़ों रुपये की अवैध शराब आपूर्ति
SIT द्वारा भूमिका संदिग्ध/दोषपूर्ण दर्ज
चार्ज–2 : SIT सिफारिशों की अवहेलना
SIT ने कार्रवाई की सिफारिश की
आबकारी विभाग ने रिपोर्ट को दरकिनार किया
चार्ज–3 : इनाम स्वरूप पदोन्नति
दोषी पाए जाने के बावजूद
EIB जैसे संवेदनशील पद पर तैनाती
सकुशल एवं सम्मानजनक सेवानिवृत्ति
चार्जशीट संख्या – 04
आरोपी अधिकारी : घनश्याम मिश्रा
पद: तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी, जौनपुर
आरोप
चार्ज–1 : जौनपुर में अवैध शराब नेटवर्क संचालन
डिप्टी एक्साइज कमिश्नर दिलीप मणि त्रिपाठी के साथ
टपरी डिस्टलरी की
बिना ड्यूटी पैड शराब की बिक्री
CL-2 लाइसेंस का दुरुपयोग
चार्ज–2 : राजस्व चोरी में सहभागिता
करोड़ों रुपये के आबकारी कर की चोरी
राज्य हितों को गंभीर क्षति
अतिरिक्त तथ्य (Governance Failure Highlight)
SIT ने पर्यवेक्षक अधिकारियों की विफलता पर स्पष्ट सवाल उठाए
शासन ने आबकारी विभाग को पत्र लिखकर पूछा:
“SIT द्वारा दोषी पाए गए अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई?”
आज तक विभाग ने कोई उत्तर नहीं दिया
इसके विपरीत:
सभी संदिग्ध/दोषी अधिकारियों को
पदोन्नति
मलाईदार पोस्टिंग
संरक्षण प्रदान किया गया
निष्कर्ष
यह चार्जशीट दर्शाती है कि:
टपरी डिस्टलरी कांड व्यक्तिगत नहीं, संस्थागत भ्रष्टाचार का मामला है
जहां:
SIT दोष सिद्ध करती है
शासन जवाब मांगता है
और विभाग इनाम देकर चुप्पी खरीद लेता है
आबकारी विभाग में नया सिद्धांत लागू होता दिखता है—
“दोष जितना बड़ा, पद उतना ऊंचा।”

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