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आबकारी विभाग में मंत्री–प्रमुख सचिव की तनातनी, मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा:


आबकारी विभाग में मंत्री–प्रमुख सचिव की तनातनी, मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा
लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग में लंबे समय से अंदरखाने चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। विभागीय मंत्री और प्रमुख सचिव के बीच चली आ रही तनातनी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक जा पहुंची है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग में कथित भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई न होने को लेकर मंत्री खासे नाराज़ हैं और इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष अपना पक्ष विस्तार से रखा।
सूत्रों का दावा है कि मंत्री का आरोप है कि विभाग में कई गंभीर शिकायतें और जांच रिपोर्ट लंबित हैं, बावजूद इसके संबंधित अधिकारियों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। इसी बात को लेकर मंत्री और प्रमुख सचिव के बीच मतभेद गहराते चले गए, जो अंततः मुख्यमंत्री तक पहुंच गए।
मुख्यमंत्री के सामने खुलकर रखा गया पक्ष
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फाइलों के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भ्रष्टाचार के आरोपों को नजरअंदाज किया गया, तो इसका सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ेगा।
बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने भी अपनी सफाई पेश की और बताया कि विभागीय प्रक्रियाओं, नियमों और जांच की औपचारिकताओं के चलते कार्रवाई में समय लग रहा है। हालांकि, मंत्री इस जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए।
विभागीय उठापटक से मुख्यमंत्री भी नाराज़
सूत्रों का कहना है कि आबकारी विभाग में लगातार सामने आ रही शिकायतें, आपसी खींचतान और निर्णयों में देरी को लेकर मुख्यमंत्री भी असंतुष्ट दिखे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संकेत दिए कि विभाग में अनुशासन और पारदर्शिता सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तस्वीर ने खोले कई राज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सामने आई एक तस्वीर ने सियासी गलियारों में हलचल और तेज कर दी है। तस्वीर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष मंत्री और प्रमुख सचिव एक साथ बैठे दिखाई दे रहे हैं। मंत्री के हाथ में एक फाइल है, जिसे वे मुख्यमंत्री को ब्रीफ करते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि प्रमुख सचिव गंभीर मुद्रा में उन्हें ध्यान से देखती हुई दिख रही हैं।
तस्वीर में माहौल सामान्य नहीं, बल्कि तनावपूर्ण साफ झलक रहा है—जो विभाग के भीतर चल रही खींचतान की पुष्टि करता है।

आबकारी विभाग में प्रमुख सचिव और विभागीय मंत्री के बीच जारी तनातनी का सीधा असर राज्य की आबकारी नीति पर पड़ता दिख रहा है। आपसी मतभेद और निर्णय प्रक्रिया में खींचतान के चलते नई आबकारी पॉलिसी अब तक जारी नहीं हो सकी है, जिससे विभागीय कामकाज से लेकर राजस्व संग्रह तक पर अनिश्चितता बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार नीति को लेकर कई अहम प्रस्ताव अटके पड़े हैं और शीर्ष स्तर पर सहमति न बन पाने के कारण सरकार को भी असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।


आने वाले दिनों में हो सकता है बड़ा फैसला
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले में जल्द ही कोई सख्त निर्णय ले सकते हैं। माना जा रहा है कि या तो लंबित मामलों में त्वरित कार्रवाई होगी, या फिर विभागीय स्तर पर बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल आबकारी विभाग की यह अंदरूनी कलह सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रही है, और अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री के अगले कदम पर टिकी हैं।

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