
नोएडा में शराब तस्करी का जाल: होली पर करोड़ों की खेप, विभागीय संरक्षण के आरोप
Noida और यमुना से जुड़े सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब तस्करी को लेकर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार Haryana से सस्ती दरों पर लाई गई शराब को छोटे-छोटे फ्लैटों, गलियों और निजी मकानों में पहले से डंप कर लिया जाता है।
बताया जाता है कि होली जैसे बड़े त्योहारों से तीन दिन पहले से लेकर तीन दिन बाद तक यह नेटवर्क सक्रिय रहता है और खुलेआम बिक्री होती है। अनुमान है कि अकेले नोएडा में ही 4 से 5 करोड़ रुपये तक के राजस्व का नुकसान होता है।
अस्थायी बार लाइसेंस के नाम पर खेल?
जांच में यह भी सामने आ रहा है कि “छोटी शराब पार्टी” या अस्थायी आयोजन के नाम पर लाइसेंस जारी कराए जाते हैं।
कागजों में सीमित अनुमति
जमीनी स्तर पर भारी मात्रा में बिक्री
लगभग 20% यूपी की और 80% हरियाणा की शराब खपाने के आरोप
इससे न केवल नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि वैध दुकानों पर भी असर पड़ता है।
ओवर रेटिंग और निलंबन आदेश पर विवाद:
ओवर रेटिंग और तस्करी के मामलों को लेकर विभागीय मंत्री द्वारा जिला आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए निलंबन का आदेश दिए जाने की चर्चा रही।
लेकिन आरोप है कि प्रमुख सचिव दीना कुमारी मीणा ने संबंधित अधिकारी को संरक्षण दिया और निलंबन आदेश अब तक औपचारिक रूप से लागू नहीं हुआ।
यदि यह आरोप सही हैं, तो सवाल खड़े होते हैं—
क्या मंत्री के निर्देशों की अनदेखी की गई?
क्या विभागीय स्तर पर किसी प्रकार का दबाव या संरक्षण काम कर रहा है?
क्या पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी?
जांच और पारदर्शिता की मांग तेज
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि
सीमावर्ती इलाकों में विशेष अभियान चलाया जाए
अस्थायी लाइसेंसों का ऑडिट हो
राजस्व हानि का वास्तविक आंकलन सार्वजनिक किया जाए
विभागीय निर्णयों पर पारदर्शिता लाई जाए
अब निगाहें शासन स्तर पर संभावित कार्रवाई और स्वतंत्र जांच पर टिकी हैं।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हरियाणा की सीमा से सटे कम आबादी वाले इलाकों, मुख्य रूप से दनकौर, जेवर और कासना बॉर्डर के रास्ते शराब की तस्करी हो रही है। Navbharat Times के अनुसार, तस्कर इन क्षेत्रों में स्थित शराब की दुकानों का फायदा उठाते हैं और अक्सर छोटे रास्तों का इस्तेमाल करके हरियाणा से सस्ती अंग्रेजी शराब नोएडा लाते हैं।
- हरियाणा बॉर्डर के इलाके: दनकौर, जेवर, कासना, और फरीदाबाद से सटे हुए सीमावर्ती गांव।
- तरीका: तस्कर छोटी गाड़ियों, मोटर साइकिल या पैदल ही कम आबादी वाले रास्तों (कच्चे रास्तों) से शराब लाते हैं, ताकि पुलिस की चेकिंग से बच सकें।




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