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सभाजीत वर्मा का तकनीकी घोटाला: रिटायरमेंट से पहले डिस्टलरी इंडस्ट्री को एंटन पार का घटिया डिजिटल अल्कोहल मीटर बेचकर करोड़ों रुपए कमीशन वसूलने की तैयारी में : कमिश्नर और भूसरेड्डी के नाम पर इंडस्ट्री पर बनाया जा रहा दबाव

लखनऊ। आबकारी महकमे में एक बड़े घोटाले की आहट साफ सुनाई दे रही है। कई तरह के गबन घोटाले में चर्चित सभाजीत वर्मा जिनकी एक डिजिटल अल्कोहल मीटर बनाने वाली कंपनी एंटन पार से काफी करीबी है उसका घटिया अल्कोहल मीटर दबाव बनाकर डिस्टलरी इंडस्ट्री को बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इस कंपनी का डिजिटल अल्कोहल मीटर बाजार भाव से 3 गुना महंगा है और बेहद घटिया किस्म का है। इस कंपनी के डिजिटल अल्कोहल मीटर की रीडिंग लगातार खराब आ रही है। आबकारी महकमे के ही कई इंस्पेक्टर ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस कंपनी के डिजिटल अल्कोहल मीटर शराब की सही स्ट्रैंथ बताने में लगातार नाकाम साबित हो रहे हैं जिससे इसकी खरीद ही बेमानी लग रही है।

कहा तो यहां तक जा रहा है कि जून महीने में रिटायर हो रहे अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी के इशारे पर तकनीकी अधिकारी सभा जीत बर्मा ने विभाग द्वारा जारी निविदा में जानबूझकर कुछ क्लॉज ऐसे डाल दिए जो केवल एंटन पार के पास ही उपलब्ध हो। सभा जीत वर्मा की यह साजिश सफल हो गई और एंटन पार को करोड़ों रुपए का यह टेंडर मिल गया।

बाजार में जो डिजिटल अल्कोहल मीटर ₹2 लाख का है उसे एंटन पार लगभग 5 लाख का बेच रहा है

सभाजीत वर्मा पर आरोप लग रहा है कि खुले बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले डिजिटल अल्कोहल मीटर जहां लगभग ₹200000 में उपलब्ध है वही अपने दोस्त की कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए सभाजीत वर्मा ने एंटन पार की सब्सटेंडर्ड डिजिटल अल्कोहल मीटर बाजार भाव से करीब 3 गुना महंगा यानी लगभग 5 लाख रुपए में खरीदा। इतना ही नहीं इसी डिजिटल अल्कोहल मीटर को डिस्टलरी इंडस्ट्री पर दबाव बनाकर बेचने का प्रयास हो रहा है। डिजिटल इंडस्ट्री डिजिटल अल्कोहल मीटर की गुणवत्ता और दाम को लेकर इसे खरीदने से बच रही हैं। सभाजीत वर्मा जोकि कुछ ही दिनों में रिटायर होने वाले हैं वह चाहते हैं कि सारे डिजिटल अल्कोहल मीटर बेचकर करोड़ों रुपए का कमीशन ले लिया जाए।

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