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“जब तक एसपी चंदौली है, राजस्व नहीं बढ़ेगा” – समीक्षा बैठक में चंदौली से उठा हैरान करने वाला सवाल:

 “जब तक एसपी बनारस है, राजस्व नहीं बढ़ेगा” – समीक्षा बैठक में चंदौली से उठा सबसे बड़ा सवाल
प्रदेश के आबकारी विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आज ऐसा बयान सामने आया जिसने पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। चंदौली के जिला आबकारी अधिकारी द्वारा दिया गया यह तर्क कि “जब तक एसपी बनारस है, राजस्व नहीं बढ़ेगा”, न सिर्फ चौंकाने वाला रहा बल्कि इसने विभागीय कार्यप्रणाली की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया।
 चंदौली: राजस्व तस्करी पर निर्भर होने का संकेत?
बैठक में जब चंदौली के कम राजस्व पर सवाल उठे, तो डीईओ  ने यह कहकर हैरान कर दिया कि जब तक एसपी बनारस है तब तक राजस्व नहीं बढ़ सकता। जिला आबकारी अधिकारी चंदौली की इस बात को गंभीरता से लेने और कार्रवाई करने के बजाय मुस्कुरा कर टाल दिया गया।
यह बयान यह दर्शाता है कि राजस्व बढ़ाने के लिए वैध उपायों के बजाय अवैध गतिविधियों पर निर्भरता की मानसिकता कहीं न कहीं मौजूद है।
इस पर वरिष्ठ अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया।
 मुरादाबाद: ओवर रेटिंग और फ्री स्कीम का खेल
मुरादाबाद में स्थिति और भी गंभीर पाई गई।
प्रमुख सचिव ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें मुखबिर के जरिए जानकारी मिली है कि यहां “एक बोतल पर एक फ्री” जैसी स्कीमें चलाई जा रही हैं।
यह सीधे-सीधे सरकारी नियमों का उल्लंघन है और इससे राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है।
साथ ही यह भी सामने आया कि यह क्षेत्र शराब कारोबारी राकेश आहूजा का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है, जिससे प्रशासनिक पकड़ पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
 प्रयागराज: शिकायतों पर अधिकारी की फटकार
प्रयागराज में ओवर रेटिंग की लगातार मिल रही शिकायतों को लेकर कमिश्नर ने जिला आबकारी अधिकारी सुशील मिश्रा को कड़ी फटकार लगाई।
स्पष्ट कहा गया कि उपभोक्ताओं से निर्धारित मूल्य से अधिक वसूली किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसके बावजूद शिकायतों का आना यह दिखाता है कि जमीनी स्तर पर निगरानी कमजोर है।
 बरेली: कर्मचारियों की बदहाल स्थिति
बरेली में लाइसेंसी दुकानों पर काम करने वाले सेल्समैन के कम वेतन का मुद्दा भी उठा।
डिप्टी को निर्देश दिए गए कि कर्मचारियों के वेतन और कार्य परिस्थितियों में सुधार किया जाए, क्योंकि खराब हालात भी अवैध प्रथाओं को बढ़ावा दे सकते हैं।
⚡ बैठक का निष्कर्ष: सिस्टम पर उठे बड़े सवाल
ओवर रेटिंग पूरे प्रदेश में व्यापक समस्या बन चुकी है।
राजस्व बढ़ाने के लिए स्पष्ट रणनीति और ईमानदार क्रियान्वयन का अभाव दिखा।
कुछ अधिकारियों के बयान और कार्यशैली ने विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाया।
निगरानी तंत्र कमजोर होने के कारण अवैध गतिविधियां पनप रही हैं।
 कुल मिलाकर, यह समीक्षा बैठक केवल आंकड़ों की समीक्षा नहीं रही, बल्कि इसने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
अब देखना यह होगा कि सख्त निर्देशों के बाद जमीनी स्तर पर कोई वास्तविक बदलाव आता है या नहीं।

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