
लखनऊ:
डीजल-पेट्रोल संकट और सरकारी खर्चों में कटौती के दावों के बीच गन्ना, चीनी एवं आबकारी विभाग की प्रमुख सचिव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ही अधिकारी के पास तीन विभाग होने के बावजूद तीन-तीन सरकारी गाड़ियों का संचालन, अलग-अलग स्टाफ और संभावित रूप से अलग सरकारी आवास अथवा कैंप कार्यालय जैसी व्यवस्थाओं को लेकर अब शासन स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि एक अधिकारी तीन विभागों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, तो संसाधनों का उपयोग भी समेकित होना चाहिए। लेकिन यदि हर विभाग की गाड़ी, ड्राइवर, ईंधन और अन्य सुविधाएं अलग-अलग चल रही हैं, तो यह सरकारी धन के अनावश्यक उपयोग और मितव्ययिता नीति की भावना के विपरीत माना जा सकता है।
खबर में बड़ा सवाल
जब प्रमुख सचिव एक ही हैं तो तीनों विभागों की गाड़ियां लगातार क्यों चल रही हैं?
क्या हर विभाग में अलग-अलग कैंप कार्यालय या आवास भी संचालित हैं?
इन गाड़ियों और सुविधाओं पर हर महीने कितना सरकारी खर्च हो रहा है?
क्या राज्य सरकार की खर्च नियंत्रण नीति का पालन हो रहा है?
क्या-क्या कार्रवाई होनी चाहिए?
1. उच्च स्तरीय वित्तीय और प्रशासनिक जांच
राज्य संपत्ति विभाग, वित्त विभाग और सतर्कता विभाग की संयुक्त जांच कराई जानी चाहिए कि प्रमुख सचिव को कुल कितनी सुविधाएं आवंटित हैं और उनका वास्तविक उपयोग क्या है।
2. अतिरिक्त गाड़ियां तत्काल वापस ली जाएं
यदि एक अधिकारी के उपयोग से अधिक वाहन संचालित पाए जाते हैं, तो अतिरिक्त गाड़ियों को तुरंत राज्य संपत्ति विभाग को वापस किया जाए।
3. ईंधन खर्च और लॉगबुक की जांच
पिछले 1 से 3 वर्षों की वाहन लॉगबुक, डीजल-पेट्रोल खर्च, ड्राइवर ड्यूटी रजिस्टर और वाहन मूवमेंट की जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सरकारी वाहन किन कार्यों में उपयोग हुए।
4. अलग-अलग आवास और कैंप कार्यालयों का ऑडिट
यदि तीनों विभागों के नाम पर अलग-अलग आवास, कैंप कार्यालय, स्टाफ या अन्य सुविधाएं संचालित हैं, तो उनका तत्काल ऑडिट कराया जाए और अनावश्यक व्यवस्थाएं समाप्त की जाएं।
5. जिम्मेदारी तय हो
यदि जांच में सरकारी संसाधनों का अनावश्यक उपयोग या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
6. सरकारी मितव्ययिता नीति का पालन अनिवार्य हो
सभी विभागों में यह आदेश जारी हो कि एक अधिकारी को आवश्यकता से अधिक वाहन, स्टाफ और सुविधाएं उपलब्ध न कराई जाएं।
जनता का सवाल
जब सरकार आम जनता से ईंधन बचाने और फिजूलखर्ची रोकने की अपील कर रही है, तब क्या अफसरशाही पर भी वही नियम लागू होंगे?
अब निगाहें इस बात पर हैं कि शासन इस मामले को गंभीरता से लेकर पारदर्शी जांच और ठोस कार्रवाई करता है या नहीं।




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