अवधभूमि

हिंदी न्यूज़, हिंदी समाचार

ना मुख्यालय में, ना ही कमिश्नर के कैंप कार्यालय में—आखिर ड्यूटी पर तैनात डिप्टी कार्मिक कुमार प्रभात चंद्र गए कहां?नए साल पर भी नहीं मिला वेतन, मुख्यालय कर्मचारियों की गुजर-बसर पर संकट:



प्रयागराज।
आबकारी मुख्यालय प्रयागराज में तैनात करीब 300 कर्मचारियों के सामने वेतन का गंभीर संकट खड़ा है, लेकिन इस संकट का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि ड्यूटी पर तैनात डिप्टी कार्मिक कुमार प्रभात चंद्र ना तो मुख्यालय में मिल रहे हैं और ना ही कमिश्नर के सर्कुलर रोड स्थित कैंप कार्यालय में। सवाल सीधा है—आखिर वे ड्यूटी के समय गए कहां?
कर्मचारियों का कहना है कि वेतन बिल, अवकाश स्वीकृति और सेवा संबंधी फाइलें प्रभात चंद्र के स्तर पर अटकी पड़ी हैं। कर्मचारी जब समाधान के लिए भटकते हैं तो हर जगह एक ही जवाब मिलता है—“साहब उपलब्ध नहीं हैं”। न कोई लिखित सूचना, न वैकल्पिक व्यवस्था और न ही किसी अन्य अधिकारी को अधिकृत किया गया।
नया साल शुरू हो चुका है, लेकिन मुख्यालय कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला। जबकि सच्चाई यह है कि मुख्यालय में तैनात कर्मचारियों का वेतन पर ही गुजर होता है—न फील्ड भत्ता, न अतिरिक्त सुविधाएं। किराया, बच्चों की फीस, राशन और इलाज सब कुछ इसी वेतन पर निर्भर है। वेतन रुकते ही घरों में संकट खड़ा हो गया है।
स्थिति और गंभीर तब हो जाती है जब मेडिकल, उपार्जित एवं अन्य वैध अवकाशों की स्वीकृति भी नहीं दी जा रही। बीमार कर्मचारी मजबूरी में ड्यूटी कर रहे हैं या फिर अनधिकृत अनुपस्थिति का जोखिम उठा रहे हैं। यह सीधे तौर पर सेवा नियमों और मानवीय संवेदनाओं का उल्लंघन है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
ड्यूटी के समय डिप्टी कार्मिक की उपस्थिति का रिकॉर्ड कहां है?
यदि वे कार्यालय में नहीं हैं तो किसके आदेश पर और कहां तैनात हैं?
और जब अधिकारी ही लापता हैं, तो कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?
कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जवाबदेही से बचने की सुनियोजित रणनीति है। जब तक अधिकारी उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक वेतन भुगतान और अवकाश स्वीकृति जैसे मामलों को जानबूझकर लंबित रखा जा सकता है।
अब निगाहें शासन और आबकारी आयुक्त पर टिकी हैं। मांग साफ है—
डिप्टी कार्मिक कुमार प्रभात चंद्र की ड्यूटी लोकेशन और उपस्थिति की जांच हो
वेतन और अवकाश रोके जाने की जवाबदेही तय की जाए
और 300 कर्मचारियों को तत्काल वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए
क्योंकि सवाल सिर्फ वेतन का नहीं है, सवाल है एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी की जवाबदेही का—जो ना मुख्यालय में दिखता है, ना कैंप कार्यालय में। फिर आखिर ड्यूटी पर तैनात अधिकारी गया कहां?

About Author