
लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग के बहुचर्चित ऑनलाइन ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद विवाद और गहरा गया है। विभागीय गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब ट्रांसफर पोर्टल पर प्रक्रिया “गोपनीय” बताई जा रही थी, तब आखिर परिणाम घोषित होने से पहले ही तमाम निरीक्षकों के नाम कैसे बाहर आ गए?
सूत्रों के मुताबिक सुबह से जिन नामों की चर्चा विभागीय व्हाट्सऐप ग्रुपों और अधिकारियों के बीच चल रही थी, देर शाम जारी सूची में लगभग वही नाम सामने आए। इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई कर्मचारी अब इस पूरे ट्रांसफर सिस्टम की जांच की मांग कर रहे हैं।
आबकारी विभाग में इस बार ट्रांसफर पोर्टल को लेकर पहले से ही विवाद चल रहा था। कई निरीक्षकों का आरोप था कि पात्र होने के बावजूद उनके लिए विकल्प नहीं खुल रहे थे, जबकि कुछ लोगों को मनचाहे जनपद और सेक्टर उपलब्ध कराए गए। अब जब अंतिम सूची सामने आई है तो “स्पाउस ग्राउंड” यानी पति-पत्नी आधार पर हुए तबादलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय चर्चाओं में कहा जा रहा है कि कई मामलों में नियमों की अनदेखी हुई, जबकि कई वास्तविक दावेदारों को राहत नहीं मिली।
विभाग के अंदर यह भी चर्चा है कि एक खास सिंडिकेट ने पूरी ट्रांसफर प्रक्रिया को नियंत्रित किया। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और कथित वसूली तंत्र ने मिलकर मनचाही पोस्टिंग कराई। प्रवर्तन, लखनऊ, औद्योगिक इकाइयों और महत्वपूर्ण सर्किलों में हुई तैनातियों को लेकर सबसे अधिक सवाल उठ रहे हैं।
आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह की कार्यशैली पहले भी विवादों में रही है और अब यह ट्रांसफर सूची भी नए विवाद का कारण बन गई है। विभागीय कर्मचारी खुलकर यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी थी, तो परिणाम आने से पहले सूची आखिर किन लोगों तक पहुंच गई थी?
सूत्रों का दावा है कि कई निरीक्षक दिनभर अपने संभावित ट्रांसफर स्थान की चर्चा करते दिखाई दिए और शाम को वही आदेश जारी हो गए। इससे यह आशंका और मजबूत हुई कि पोर्टल की प्रक्रिया के समानांतर अंदरखाने “फाइनल सेटिंग” पहले ही तय हो चुकी थी।
अब कर्मचारी संगठनों और विभागीय हलकों में इस पूरे ट्रांसफर प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग तेज हो रही है। कई लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि पोर्टल लॉग, ऑप्शन ओपनिंग डेटा और अंतिम अनुमोदन प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर किन आधारों पर यह बड़े पैमाने का फेरबदल किया गया।
आबकारी विभाग में बड़ा फेरबदल, 119 निरीक्षकों के तबादले
उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 119 आबकारी निरीक्षकों के तबादले कर दिए गए हैं। आबकारी आयुक्त कार्यालय प्रयागराज की ओर से जारी आदेश संख्या 1143 दिनांक 29 मई 2026 के तहत विभिन्न जिलों, सेक्टरों, डिस्टिलरी, प्रवर्तन इकाइयों और थोक लाइसेंस इकाइयों में तैनात निरीक्षकों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
तबादला सूची में प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा, सहारनपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, बरेली, मथुरा, झांसी, अयोध्या, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ और कई अन्य जिलों के निरीक्षक शामिल हैं। कई अधिकारियों को प्रवर्तन कार्यालयों से हटाकर फील्ड में भेजा गया है, जबकि कई निरीक्षकों को डिस्टिलरी, बॉन्ड लाइसेंस और होलसेल लाइसेंस इकाइयों में नई तैनाती मिली है।
सूची में प्रमुख नामों में प्रशांत कुमार को प्रयागराज प्रवर्तन-1 से रायबरेली सदर सर्किल, रेखा श्रीवास्तव को आयुक्त कार्यालय प्रयागराज से लखनऊ सेक्टर-3, अमित कुमार श्रीवास्तव को प्रयागराज प्रवर्तन-2 से रायबरेली सर्किल-4 तथा दिनेंद्र कुमार सिंह को बरेली प्रवर्तन-1 से गौतमबुद्धनगर सर्किल-3 भेजा गया है।
इसी तरह पूनम तोमर को प्रयागराज से कानपुर नगर सेक्टर-3, नेहा कुमारी को प्रयागराज प्रवर्तन-2 से लखनऊ सेक्टर-10, रवि कुमार को टास्क फोर्स प्रयागराज से सीएसडी कैंटीन लखनऊ तथा आलोक सिंह को जौनपुर से बॉन्ड लाइसेंस लखनऊ भेजा गया है।
वाराणसी सेक्टर-5 में अंगद कुमार गोअर की तैनाती की गई है, जबकि कई निरीक्षकों को सहारनपुर प्रवर्तन इकाइयों में बड़े पैमाने पर भेजा गया है। आदेश के अंतिम हिस्से में निर्देश दिया गया है कि सभी संबंधित अधिकारी तत्काल कार्यभार ग्रहण कर पोर्टल पर जॉइनिंग और रिलीविंग अपडेट सुनिश्चित कराएं।
सूची में कई ऐसे तबादले भी हैं जिन्हें विभाग के भीतर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रवर्तन इकाइयों से फील्ड पोस्टिंग और फील्ड से डिस्टिलरी एवं लाइसेंस इकाइयों में भेजे गए अधिकारियों को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। खास तौर पर सहारनपुर प्रवर्तन इकाइयों में एक साथ बड़ी संख्या में निरीक्षकों की तैनाती को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि स्थानांतरित निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर नई तैनाती स्थल पर जॉइन करना होगा तथा सेवा आचरण नियमावली का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।




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