
लखनऊ। गोंडा के नवाबगंज स्थित स्टार लाइट डिस्टलरी से गबन किए गए 58 हजार लीटर ईएनए घोटाले का तार जॉइंट एक्साइज कमिश्नर लखनऊ दिलीप कुमार मणि त्रिपाठी और अभी हाल ही में अवकाश प्राप्त हुए पूर्व जॉइंट एक्साइज कमिश्नर ईआईबी जैनेंद्र उपाध्याय की भूमिका भी अब सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि वर्तमान जॉइंट एक्साइज कमिश्नर लखनऊ दिलीप कुमार मणि त्रिपाठी जो कि डिप्टी एक्साइज कमिश्नर देवीपाटन मंडल के रूप में अपनी तैनाती के समय स्टार लाइट डिस्टलरी को 29 -29 लीटर ईएनए इंपोर्ट करने का दो परमिट स्टार लाइट डिस्टलरी को जारी किया। परमिट की वैधता मात्र 30 दिन थी। यह विवरण विभाग की ऑफिशल वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया। बताया जा रहा है कि निर्धारित वैधता तिथि तक स्टार लाइट ने ईएनए इंपोर्ट नहीं किया तो जारी किया हुआ परमिट स्वत: ही निरस्त हो गया। अब सवाल यह पैदा होता है कि परमिट निरस्त होने के बावजूद मध्य प्रदेश के नौगांव स्थित स्टार लाइट की ही डिस्टलरी ने ईएनए की बिक्री कैसे कर दी। और अब यह भी जानकारी आ रही है कि 29000 लीटरईएनए लेकर टैंकर नौगांव डिस्टलरी से मध्य प्रदेश की सीमा पार करके झांसी और कानपुर तक पहुंचा है। टैंकर के जीपीएस लोकेशन के मुताबिक उसने दो टोल पर किया। इसके बाद टैंकर की कोई लोकेशन नहीं दिखाई दी। सवाल या पैदा हो रहा है कि इस मामले में प्रवर्तन इकाइयों ने अपनी भूमिका क्यों नहीं निभाई। उनको इस बात की जानकारी क्यों नहीं मिल पाई कि नवाबगंज स्थित स्टार लाइट डिस्टलरी ने 58 हजार लीटर ईएनए इंपोर्ट करने वाली है और मध्य प्रदेश के नौगांव से 2 बार टैंकर 29000 लीटर ईएनए लेकर मध्य प्रदेश की सीमा पार कर उत्तर प्रदेश के दो टोल भी पार कर चुका है। डिप्टी एक्साइज कमिश्नर आलोक कुमार की भूमिका इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योकि उन्होंने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट में प्रवर्तन इकाइयों की भूमिका पर चुप्पी साध ली। तथा जॉइंट एक्साइज कमिश्नर जो समय डिप्टी एक्साइज कमिश्नर भी रहे उनके पर्यवेक्षणीय दायित्व पर सवाल खड़ा क्यों नहीं किया। आलोक कुमार ने आबकारी मुख्यालय में 10 अक्टूबर 2024 को स्टार लाइट डिस्टलरी में कुल 27610 लीटर ईएनए बहने की सूचना दी लेकिन जून 2024 में ही 58000 लीटर ईएनए गबन हो गया और उसके संबंध में उन्होंने 10 अक्टूबर को भेजी अपनी रिपोर्ट में जिक्र क्यों नहीं किया। ऐसी कौन सी स्थिति खड़ी हुई जिसके बाद उन्होंने 2 दिसंबर 2024 को जून में हुए 58000 लीटर ईएनए घोटाले की जानकारी मुख्यालय को दी। तमाम ऐसे सवाल हैं जिनका उत्तर तभी मिलेगा जब इस घोटाले की जांच शासन स्तर पर होगी।
आबकारी आयुक्त की भूमिका अब सवालों के घेरे में है क्योंकि वह अपने भ्रष्टाचारी नवरत्नों को बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। आलोक कुमार और दिलीप मणि त्रिपाठी जैनेंद्र उपाध्याय यह सब आबकारी आयुक्त की आंख के तारे हैं। देखना है इस बड़े घोटाले के गुनहगार जेल जाते हैं अथवा आबकारी आयुक्त के पीछे सुरक्षित रहकर मजे करते हैं।




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