
महोबा/संवाददाता –
जिला आबकारी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद का रुपये लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। वीडियो में अधिकारी को टेबल पर रखे रुपये उठाते हुए साफ़ देखा जा सकता है। आरोप है कि स्थानीय शराब ठेकेदार से स्थायी लाइसेंस दिलाने के एवज में 12 हजार रुपये की मांग की गई थी।
शराब दुकान नंबर छह के अनुज्ञापी कुलदीप सिंह ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और वरिष्ठ आबकारी अधिकारियों को भेजे शिकायत पत्र में बताया कि वह पहली बार शराब ठेका लेने आए थे। आरोप है कि जिला आबकारी अधिकारी ने लाइसेंस प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए रुपये मांगे और जैसे ही रकम दी गई, उस वक्त का वीडियो बना लिया गया।
वीडियो में एक व्यक्ति यह कहते हुए सुनाई देता है – “कागज में लपेट कर रख दो”, जिसके बाद अधिकारी को रुपये उठाते हुए दिखाया गया है।
हालांकि, जिला आबकारी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने आरोपों से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि वायरल वीडियो झूठा है और उनकी छवि खराब करने के लिए किसी ने साज़िश के तहत प्रसारित किया है।
इस मामले में डीएम महोबा ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि प्रथम दृष्टया मामले में गड़बड़ी पाई जाती है तो कड़ी कार्रवाई होगी। वहीं, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि आबकारी विभाग में लंबे समय से लाइसेंस और अनुमतियों के नाम पर पैसों की लेन-देन की शिकायतें सामने आती रही हैं।
अब बड़ा सवाल
इस वायरल वीडियो के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। क्या शराब ठेकों की नीलामी और लाइसेंस प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है या फिर अधिकारियों की जेब भरने का जरिया?
फिलहाल, विभागीय जांच का इंतज़ार है, लेकिन इस वीडियो ने आबकारी महकमे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।




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