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अबकारी आयुक्त समेत कई अधिकारी मुख्यालय से लापता:


प्रदेश सरकार द्वारा बायोमैट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था को अनिवार्य किए जाने के बावजूद आबकारी मुख्यालय से विभाग अध्यक्ष समेत बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की लगातार अनुपस्थिति अब शासन के आदेशों की खुलेआम अवहेलना मानी जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब बायोमैट्रिक हाजिरी अनिवार्य है, तो फिर मुख्यालय से गायब अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

सूत्रों के मुताबिक, आबकारी मुख्यालय के कई ऐसे सेक्शन हैं, जहां अधिकारी और कर्मचारी नियमित रूप से तैनात ही नहीं मिलते। इसके बावजूद न तो उनके खिलाफ अनुपस्थिति दर्ज हो रही है और न ही किसी तरह की अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें विभाग अध्यक्ष स्तर तक के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।

शासन का स्पष्ट निर्देश है कि बिना बायोमैट्रिक उपस्थिति के न तो उपस्थिति मान्य होगी और न ही वेतन निर्गत किया जाएगा। ऐसे में यह बड़ा सवाल बन गया है कि जो अधिकारी मुख्यालय में आ ही नहीं रहे, उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की जा रही है और उन्हें हर माह वेतन कैसे मिल रहा है।

सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि यदि आबकारी मुख्यालय की बायोमैट्रिक मशीनों का डेटा और सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई बड़े नामों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। यह भी आरोप सामने आए हैं कि कुछ अधिकारियों की उपस्थिति कागजी रूप से पूरी करने के लिए फाइलें बाहर भेजकर हस्ताक्षर कराए जाते हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि शीरा लाइसेंस, टास्कफोर्स और स्टेटिक्स जैसे राजस्व से जुड़े संवेदनशील विभागों में अधिकारी ही नियमित रूप से मौजूद नहीं हैं। इसका सीधा असर नीतिगत फैसलों, निगरानी व्यवस्था और राजस्व संग्रह प्रणाली पर पड़ रहा है।

अब विभाग के भीतर ही यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि शासन स्तर से इस पूरे मामले की सीधे मॉनिटरिंग नहीं हुई, तो बायोमैट्रिक व्यवस्था भी केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं इन अनुपस्थित अधिकारियों को विभागीय संरक्षण तो नहीं मिल रहा।

सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला शासन स्तर तक पहुंच चुका है और संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही बायोमैट्रिक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और वेतन भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की संयुक्त जांच कराई जा सकती है। यदि ऐसा होता है तो कई अधिकारियों पर एक साथ निलंबन, वेतन वसूली और विभागीय कार्रवाई की तलवार गिर सकती है।

फिलहाल आबकारी विभाग की ओर से इस गंभीर मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन शासन के आदेशों की खुलेआम अनदेखी और उसके बावजूद कार्रवाई न होना अब पूरे तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।


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