
आबकारी विभाग में बड़े घोटाले की आहट, अनाज से बनने वाली शराब के उत्पादन आँकड़ों में भारी खेल का शक
प्रदेश के आबकारी विभाग में मुख्यालय से लेकर शासन स्तर तक बड़े अधिकारियों की कथित मिलीभगत से एक बड़े घोटाले की आहट सुनाई दे रही है। चावल और मक्के से बनने वाली शराब के उत्पादन आँकड़ों में गंभीर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं, जिससे विभाग की सांख्यिकी (स्टैटिस्टिक्स) और उत्पादन विंग दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।
सूत्रों के अनुसार डिस्टिलरियों में चावल की खरीद मूल्य में हेरफेर कर कागजों में अधिक दाम दिखाए गए, जबकि वास्तविकता में खराब गुणवत्ता वाले सस्ते चावल का उपयोग किए जाने की आशंका है। यही नहीं, कई डिस्टिलरी गोदामों में चावल का अधिक भंडारण और अधिक उपभोग दर्शाया गया, लेकिन इसके अनुपात में शराब उत्पादन के आँकड़े अपेक्षाकृत कम बताए गए। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि उत्पादन और खपत के बीच जानबूझकर अंतर रखा गया।
लैब पुष्टि के बिना चलता रहा खेल
जानकारों का कहना है कि किस प्रकार के अनाज से शराब का उत्पादन किया गया, इसकी विभागीय लैब से स्पष्ट पुष्टि नहीं कराई गई। जबकि मक्का और चावल से बनने वाले अल्कोहल का औसत उत्पादन अलग-अलग होता है और दोनों के खरीद मूल्य में भी भारी अंतर है। इसके बावजूद उत्पादन आँकड़ों में यह अंतर साफ दिखाई नहीं देता, जो सीधे तौर पर पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।
इनकम टैक्स छापे से हड़कंप
हाल ही में धामपुर चीनी मिल एवं डिस्टिलरी पर पड़े इनकम टैक्स छापे के बाद आबकारी विभाग के शीर्ष अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। इसके बाद आबकारी अधिकारियों के साथ-साथ एसडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा संयुक्त मुआइना शुरू किया गया है, जिससे मामला और गंभीर होता दिख रहा है।
कई जिलों की डिस्टिलरी रडार पर
सूत्र बताते हैं कि रामपुर, सीतापुर, कानपुर और पूर्वांचल की कई डिस्टिलरी जांच के रडार पर हैं। बाराबंकी की एक डिस्टिलरी को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में एक पूर्व अतिरिक्त आयुक्त, जो वर्तमान में आउटसोर्सिंग पर कार्यरत हैं, उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
अभिलेख गायब, जवाबदेही तय नहीं
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कमिश्नर के करीबी माने जाने वाले सांख्यिकी से जुड़े अधिकारी के पास खरीद और उत्पादन से संबंधित कोई ठोस अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि पूरे सिस्टम में सुनियोजित तरीके से गड़बड़ी को छिपाया गया।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—
- क्या अनाज का वास्तविक उपयोग कागजी आँकड़ों से कहीं अधिक हुआ?
- क्या सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचाया गया?
- और क्या इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच हो पाएगी?
वर्तमान में आबकारी विभाग में संभावित अनियमितताओं और शराब उत्पादन से जुड़े आँकड़ों को लेकर बढ़ते संदेह के बीच मंडल स्तर के आबकारी अधिकारी, जिला आबकारी अधिकारी तथा एसडीएम स्तर के अधिकारी संयुक्त रूप से डिस्टिलरियों की गहन जांच-पड़ताल में जुट गए हैं।
सूत्रों के अनुसार यह संयुक्त निरीक्षण विशेष रूप से डिस्टिलरियों में अनाज की खरीद, भंडारण, उपभोग तथा उससे जुड़े शराब उत्पादन के वास्तविक आँकड़ों के सत्यापन के उद्देश्य से किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान गोदामों में उपलब्ध चावल व मक्के के स्टॉक, क्रय अभिलेख, उत्पादन रजिस्टर, निर्गमन विवरण और सांख्यिकी आँकड़ों का आपसी मिलान किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि जांच का दायरा केवल भौतिक सत्यापन तक सीमित नहीं है, बल्कि लैब रिपोर्ट, गुणवत्ता परीक्षण, औसत अल्कोहल उत्पादन मानक और राजस्व से जुड़े आंकड़ों की भी पड़ताल की जा रही है। खास तौर पर उन डिस्टिलरियों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां अनाज की खपत और घोषित उत्पादन के बीच असामान्य अंतर सामने आए हैं।
अधिकारियों का यह संयुक्त अभियान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शासन स्तर पर मामले को गंभीरता से लिया गया है। माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे विशेष ऑडिट, विस्तृत जांच अथवा जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की जा सकती है।
फिलहाल विभागीय हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और माना जा रहा है कि यदि जांच आगे बढ़ी तो आबकारी विभाग के कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।




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