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वाराणसी: स्वीकृत स्थान छोड़कर मढौली में चल रही चुरामनपुर की देशी शराब दुकान, अंदर चखना और पानी की बिक्री भी जारीथाना लोहता क्षेत्र का मामला, स्थानीय सर्कल इंस्पेक्टर की कथित मिलीभगत से चल रहा अवैध खेल:


वाराणसी: स्वीकृत स्थान छोड़कर मढौली में चल रही चुरामनपुर की देशी शराब दुकान, : अंदर चखना और पानी की बिक्री भी जारी:
थाना लोहता क्षेत्र का मामला, स्थानीय सर्कल इंस्पेक्टर की कथित मिलीभगत से चल रहा अवैध खेल:

वाराणसी जनपद के थाना लोहता क्षेत्र अंतर्गत चुरामनपुर में स्वीकृत देशी शराब की दुकान अपने निर्धारित स्थान पर संचालित न होकर मढौली गांव में अवैध रूप से संचालित की जा रही है। इतना ही नहीं, दुकान के अंदर खुलेआम चखना बेचा जा रहा है और पानी की बिक्री भी की जा रही है, जो आबकारी नियमों का सीधा उल्लंघन है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा अवैध कारोबार स्थानीय सर्कल इंस्पेक्टर की कथित मिलीभगत से धड़ल्ले से चल रहा है। लोगों का कहना है कि बिना विभागीय संरक्षण के न तो दुकान का स्थान बदला जा सकता है और न ही दुकान के अंदर इस तरह खुलेआम शराब पिलाई जा सकती है।

सूत्रों की मानें तो चुरामनपुर में जहां यह दुकान स्वीकृत है, वहां लम्बे समय से दुकान बंद पड़ी है, जबकि असल बिक्री मढौली में हो रही है। यह इलाका घनी आबादी वाला है, जिससे महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शाम होते ही शराबियों का जमावड़ा लग जाता है और सड़क पर खुलेआम शराब पी जाती है, जिससे विवाद की स्थिति बनी रहती है।

नियमों के अनुसार, उत्तर प्रदेश आबकारी नीति 2024-25 के नियम 19 के तहत बिना अनुमति दुकान का स्थान परिवर्तन पूरी तरह अवैध है। वहीं आबकारी अधिनियम की धारा 34 के तहत दुकान के अंदर  चखाना बेचना अपराध की श्रेणी में आता है। इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों के अनुसार दुकान पर केवल मदिरा बिक्री की अनुमति होती है, पानी या अन्य कोई वस्तु बेचना भी नियम विरुद्ध है। आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत ऐसे मामलों में लाइसेंस निरस्त करने और जुर्माना लगाने का प्रावधान है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी आबकारी विभाग की ओर से सिर्फ दिखावटी कार्रवाई की जाती है और फिर सब कुछ पहले जैसा ही चलने लगता है। इसी कारण अब सर्कल इंस्पेक्टर की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है वहीं जिला आबकारी अधिकारी पर यह गंभीर सवाल है कि इस दुकान के व्यवस्थापन से आज तक उन्होंने मुआयना किया है या नही ।

यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है और आरोप सही पाए जाते हैं, तो सर्कल इंस्पेक्टर के खिलाफ विभागीय जांच, निलंबन, वेतन रोके जाने, प्रतिकूल प्रविष्टि और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। वहीं दुकान संचालक का लाइसेंस निरस्त कर भारी जुर्माना और आपराधिक कार्यवाही भी हो सकती है।

स्थानीय जनता ने जिलाधिकारी वाराणसी और आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आगे इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लग सके।


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