
सीतापुर से निकले 7 मोलासेस टैंकर गायब!
राजस्थान–उत्तराखंड सीमा तक तस्करी की आशंका, आबकारी महकमा कटघरे में
सीतापुर जनपद की खांडसारी इकाइयों से कपिल पशु आहार यूनिट, कानपुर देहात के लिए भेजे गए मोलासेस से भरे सात टैंकर रास्ते में ही गायब हो जाने का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। आबकारी विभाग से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि ये टैंकर अपने तय गंतव्य तक नहीं पहुंचे और न ही उनके संबंध में कोई स्पष्ट आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आया है।
सूत्रों का दावा: रास्ते में डायवर्जन, तस्करी की आशंका
सूत्रों के अनुसार ये सभी टैंकर पशु आहार निर्माण के लिए स्वीकृत मोलासेस कोटे के अंतर्गत रवाना किए गए थे। लेकिन तय समयावधि में टैंकरों का यूनिट तक न पहुंचना इस बात की ओर इशारा करता है कि मोलासेस को रास्ते में ही अवैध रूप से उतारकर खपाया गया।
राजस्थान और उत्तराखंड सीमा पर शक
सूत्रों का कहना है कि इस मामले की कड़ियां अब राजस्थान और उत्तराखंड की सीमाओं तक जुड़ती दिखाई दे रही हैं। आशंका जताई जा रही है कि गायब टैंकरों को राज्य सीमा की ओर मोड़कर तस्करी नेटवर्क के हवाले किया गया, जहां मोलासेस की अवैध खपत पहले भी चर्चा में रही है।
ट्रैक एंड ट्रेस सिस्टम पर सवाल
सूत्र यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि मोलासेस परिवहन के लिए लागू ट्रैक एंड ट्रेस / ई-परमिट सिस्टम प्रभावी था, तो एक साथ सात टैंकरों का गायब होना कैसे संभव हुआ? इससे सिस्टम की विफलता या जानबूझकर की गई अनदेखी—दोनों की आशंका गहराती है।
कपिल पशु आहार यूनिट की भूमिका भी जांच के घेरे में
क्योंकि टैंकर कपिल पशु आहार यूनिट, कानपुर देहात के नाम पर भेजे गए थे, ऐसे में सूत्रों के मुताबिक यह भी जांच का विषय है कि
यूनिट को पूरा मोलासेस मिला या नहीं,
और यदि नहीं मिला तो इसकी सूचना आबकारी विभाग को क्यों नहीं दी गई।
कई अधिकारियों की निगरानी भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रकरण में
सीतापुर जिला आबकारी अधिकारी,
संबंधित सर्किल इंस्पेक्टर,
डिप्टी एक्साइज कमिश्नर (लखनऊ)
की निगरानी भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मोलासेस जैसे नियंत्रित पदार्थ के परिवहन में इतनी बड़ी चूक को सामान्य लापरवाही नहीं माना जा रहा।
अब तक कार्रवाई न होने से बढ़ा संदेह
सूत्रों का दावा है कि टैंकरों के गायब होने की जानकारी विभागीय स्तर पर होने के बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई, एफआईआर या सार्वजनिक बयान की पुष्टि नहीं हुई है। इस चुप्पी को लेकर विभाग की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों की मांग
सूत्रों के अनुसार अब जरूरत है कि
सातों टैंकरों के ई-परमिट, जीपीएस और रूट चार्ट की उच्चस्तरीय जांच हो,
राजस्थान और उत्तराखंड सीमा पर टोल व सीसीटीवी डेटा खंगाला जाए,
और मोलासेस तस्करी के संभावित नेटवर्क पर अंतरराज्यीय कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष (सूत्रों के हवाले से)
सीतापुर से कानपुर देहात के लिए भेजे गए सात मोलासेस टैंकरों का गायब होना अब केवल विभागीय लापरवाही का मामला नहीं रह गया है। राजस्थान और उत्तराखंड सीमा तक जुड़ती कड़ियां इसे अंतरराज्यीय मोलासेस तस्करी के गंभीर शक में बदल रही हैं। अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




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