
लखनऊ/प्रयागराज।
विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि लखनऊ में आबकारी विभाग के कुछ अधिकारी कथित रूप से आपस में इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि अवध भूमि न्यूज़ के खिलाफ किसी बड़े अधिवक्ता को नियुक्त कर उसे किसी फर्जी प्रकरण में उलझाने की रणनीति बनाई जाए। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक बयान जारी किया गया है।
अवध भूमि न्यूज़ द्वारा पिछले कुछ समय से आबकारी विभाग में कथित अनियमितताओं, प्रशासनिक अव्यवस्था, राजस्व संबंधी प्रश्नों तथा विभागीय कार्यप्रणाली से जुड़े मामलों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जाता रहा है। सूत्रों का दावा है कि इन खबरों के कारण विभाग के कुछ अधिकारी असहज और नाराज बताए जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, विभाग के भीतर कुछ अधिकारी अवध भूमि न्यूज़ के विरुद्ध शिकायतों और अन्य कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि ऐसा है तो यह प्रेस की स्वतंत्रता और जनहित से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
उल्लेखनीय है कि एक ओर शासन स्तर पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार जोर दिया जा रहा है तथा विभिन्न विभागों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर चर्चा है कि विभाग के कुछ अधिकारी ऐसी कार्रवाइयों से बेचैन हैं। सूत्रों का कहना है कि अवध भूमि न्यूज़ में प्रकाशित कई खबरों का संज्ञान शासन स्तर पर लिया गया, जिसके बाद विभिन्न मामलों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक और विभागीय कार्रवाइयां भी हुईं। बताया जाता है कि इसी वजह से विभाग के कुछ भ्रष्ट और विवादित अधिकारी समाचार संस्थान के प्रति नाराजगी रखते हैं।
मीडिया और जनहित के जानकारों का मानना है कि यदि किसी समाचार संस्था द्वारा प्रकाशित कोई तथ्य गलत है तो उसका कानूनी और तथ्यात्मक जवाब दिया जा सकता है, लेकिन यदि किसी मीडिया संस्थान को दबाव में लेने, डराने या झूठे मामलों में फंसाने का प्रयास किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए चिंताजनक विषय होगा।
अवध भूमि न्यूज़ एडमिन ने कहा है कि वह सूचना की पर्देदारी नहीं होने देगा और जो सच है वह सबके सामने लाएगा। किसी तरह के दबाव में आने का सवाल ही नहीं पैदा होता है। एडमिन ने यह भी कहा कि पहले भी आबकारी विभाग के एक शीर्ष अधिकारी के करीबी निरीक्षक द्वारा acjm court number 2 प्रयागराज तथा acjm code number 5 प्रयागराज में झूठा प्रकरण दर्ज कर चुके हैं लेकिन कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े मामलों के उजागर होने के बाद कुछ अधिकारी जवाबदेही से बचने के लिए ऐसे कदमों पर विचार कर रहे हैं? यदि आरोपों में सत्यता है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।




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