
लखनऊ, 28 अप्रैल 2026
उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग में नियमों के कथित उल्लंघन, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक फैसलों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। समाजसेवी, वरिष्ठ रंगकर्मी और स्वतंत्र पत्रकार दबीर सिद्दीकी ने अपर मुख्य सचिव को भेजे अपने विस्तृत पत्र में विभागीय कार्यप्रणाली पर कई बड़े सवाल उठाए हैं और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
नियमावली का हवाला: 22 दिसंबर 2022 का आदेश केंद्र में
शिकायत में संस्कृति अनुभाग संख्या-2769/चार-2022, दिनांक 22 दिसंबर 2022 की नियमावली का हवाला देते हुए कहा गया है कि:
कलाकारों को प्रति वर्ष अधिकतम 3 कार्यक्रम दिए जाने का प्रावधान है
सभी कार्यक्रमों का विवरण संस्कृति विभाग ऐप पर अपडेट करना अनिवार्य है
50% अग्रिम और 50% भुगतान कार्यक्रम के दिन या अगले दिन देने का नियम है
कॉमर्शियल कार्यक्रमों को किसी भी प्रकार का सहयोग न देने का स्पष्ट प्रावधान है
मीडिया कर्मियों पर लगभग 10 लाख रुपये प्रति वर्ष खर्च किया जाता है
पोस्टिंग पर गंभीर सवाल
आरोप है कि पी.सी.एस. अधिकारी डॉ. सृष्टि धवन को अपर निदेशक का पद सृजित न होने के बावजूद उस पद पर नियम विरुद्ध संबद्ध किया गया है। शिकायत में इसे प्रशासनिक प्रक्रिया और नियमों का उल्लंघन बताया गया है।
नियमों के पालन में लापरवाही के आरोप
पत्र में कहा गया है कि:
कलाकारों को दिए गए कार्यक्रमों का विवरण ऐप पर अपडेट नहीं किया जा रहा
निर्धारित तीन कार्यक्रम की सीमा का पालन नहीं हो रहा
भुगतान प्रक्रिया में 50% अग्रिम और समय पर शेष भुगतान का नियम टूट रहा है
मीडिया खर्च बनाम ग्राउंड रियलिटी
शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि विभाग द्वारा मीडिया कर्मियों पर हर साल करीब 10 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रमों का डेटा अपडेट नहीं होता। इससे खर्च की पारदर्शिता और उसके औचित्य पर सवाल खड़े किए गए हैं।
कॉमर्शियल कार्यक्रम को भुगतान का आरोप
नियमों में स्पष्ट रोक के बावजूद “रेपटवा” नामक कॉमर्शियल कार्यक्रम को भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है। इसे नियमावली की अवहेलना बताते हुए इसकी जांच और भुगतान की रिकवरी की मांग की गई है।
आपराधिक कृत्य का आरोप
शिकायत में इसे उ0प्र0 सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 1956 के नियम 3 का उल्लंघन बताया गया है। साथ ही, शासकीय धन के कथित दुरुपयोग को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दंडनीय बताया गया है।
6 बड़ी मांगें (एक्शन प्वाइंट्स)
शिकायतकर्ता ने शासन से निम्नलिखित तत्काल कार्रवाई की मांग की है:
डॉ. सृष्टि धवन का कथित नियम विरुद्ध संबद्ध तत्काल निरस्त किया जाए
पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू की जाए
मीडिया खर्च की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो
“रेपटवा” कार्यक्रम को किए गए भुगतान की जांच और रिकवरी हो
सभी दोषी अधिकारियों का तत्काल निलंबन किया जाए
7 दिनों के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती है, तो मामला उच्च न्यायालय में ले जाया जाएगा।
विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले पर अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह मामला शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।




More Stories
Story: “BJP Set the Field, But the Left Is Playing the Game – Bengal’s Changing Political
मेरठ में 14 करोड़ की GST चोरी का पर्दाफाश: गुटखा कारोबार के पीछे ‘डबल कंपनी गेम’, देश में पहला बड़ा केस:
बड़ा खुलासा: हरियाणा से यूपी तक फैला शराब माफिया का संगठित खेल — 35 लाख की खेप पकड़ी, लेकिन सिस्टम पर सबसे बड़े सवाल!