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“ऑनलाइन नीति ध्वस्त! आबकारी विभाग में ऑफलाइन तबादलों पर घमासान, वसूली और मनमानी पोस्टिंग के आरोप”

उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग में उप आबकारी निरीक्षकों के तबादलों को लेकर जारी विवाद अब और गहराता जा रहा है। 25 मई 2026 को जारी 11 अलग-अलग स्थानांतरण आदेशों पर विभागीय कर्मचारियों और सूत्रों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि सभी तबादले ऑफलाइन प्रक्रिया से किए गए, जबकि शासन की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट रूप से ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान किया गया था। �
Transfer sub inspector 25-May-2026 15-24-17.pdf
विभागीय हलकों में चर्चा है कि यदि शासनादेश साफ तौर पर कहता था कि तबादले ऑनलाइन होंगे, तो आखिर उप आबकारी निरीक्षकों के ट्रांसफर ऑफलाइन क्यों किए गए? क्या इसके लिए विभागीय मंत्री की विशेष मंजूरी ली गई थी? यदि मंत्री स्तर से कोई अनुमति नहीं ली गई, तो इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और कदाचार माना जा सकता है।
सूत्रों का दावा है कि कई अधिकारियों को पसंदीदा तैनाती देने के लिए कथित रूप से भारी वसूली हुई है। हालांकि इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह अलग-अलग फाइलों में एक-एक अधिकारी के आदेश जारी हुए हैं, उससे संदेह और गहरा गया है। विभाग के अंदर यह चर्चा भी तेज है कि यदि आबकारी उप निरीक्षकों के तबादले भी ऑनलाइन प्रक्रिया से नहीं होंगे, तो पूरी ट्रांसफर नीति केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी और भविष्य में भी मनमाने तरीके से पोस्टिंग की आशंका बनी रहेगी।
पीडीएफ में दर्ज आदेशों के अनुसार कई अधिकारियों को प्रवर्तन इकाइयों, जिला कार्यालयों और चीनी मिलों में स्थानांतरित किया गया। इनमें आगरा से गोण्डा, बस्ती से लखीमपुर खीरी और आजमगढ़ से बिजनौर जैसी तैनातियां शामिल हैं। सभी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए और अधिकारियों को स्वतः कार्यमुक्त मानते हुए नई तैनाती ग्रहण करने के निर्देश दिए गए। �
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पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल विभाग के शीर्ष अधिकारियों की चुप्पी को लेकर उठ रहा है। आबकारी आयुक्त और अपर आबकारी आयुक्त की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यही वजह है कि विभागीय कर्मचारियों और राजनीतिक हलकों में यह मांग उठने लगी है कि सभी ऑफलाइन तबादलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शासनादेश के बावजूद ऑफलाइन प्रक्रिया क्यों अपनाई गई।

उप आबकारी निरीक्षकों के तबादलों को लेकर जारी विवाद अब और गहराता जा रहा है। 25 मई 2026 को जारी 11 अलग-अलग स्थानांतरण आदेशों पर विभागीय कर्मचारियों और सूत्रों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि सभी तबादले ऑफलाइन प्रक्रिया से किए गए, जबकि शासन की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट रूप से ऑनलाइन और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान किया गया था।

विभागीय हलकों में चर्चा है कि यदि शासनादेश साफ तौर पर कहता था कि तबादले ऑनलाइन होंगे, तो आखिर उप आबकारी निरीक्षकों के ट्रांसफर ऑफलाइन क्यों किए गए? क्या इसके लिए विभागीय मंत्री की विशेष मंजूरी ली गई थी? यदि मंत्री स्तर से कोई अनुमति नहीं ली गई, तो इसे गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और कदाचार माना जा सकता है।

आदेशों के अनुसार कई अधिकारियों को प्रवर्तन इकाइयों, जिला कार्यालयों और चीनी मिलों में स्थानांतरित किया गया। इनमें आगरा से गोण्डा, बस्ती से लखीमपुर खीरी और आजमगढ़ से बिजनौर जैसी तैनातियां शामिल हैं। सभी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किए गए और अधिकारियों को स्वतः कार्यमुक्त मानते हुए नई तैनाती ग्रहण करने के निर्देश दिए गए।

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल विभाग के शीर्ष अधिकारियों की चुप्पी को लेकर उठ रहा है। और की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यही वजह है कि विभागीय कर्मचारियों और राजनीतिक हलकों में यह मांग उठने लगी है कि सभी ऑफलाइन तबादलों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि शासनादेश के बावजूद ऑफलाइन प्रक्रिया क्यों अपनाई गई।

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