
बरेली। अवैध शराब कारोबार और शराब तस्करी से जुड़े मामलों में लंबे समय से चर्चित हिस्ट्रीशीटर मनोज जायसवाल तथा उसके चार सहयोगियों पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें शराब माफिया घोषित कर दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है। साथ ही गिरोह की गतिविधियों पर निगरानी और अवैध संपत्तियों की जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन लोगों को किया गया शराब माफिया घोषित
पुलिस द्वारा जिन लोगों को शराब माफिया घोषित किया गया है, उनमें—
- मनोज जायसवाल (ग्रीन पार्क कॉलोनी, बरेली)
- अजय जायसवाल
- अशोक दीक्षित
- संजय कुमार
- अरुण कुमार पांडेय
शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि यह गिरोह अवैध शराब के कारोबार और तस्करी के माध्यम से आर्थिक लाभ अर्जित करता रहा है।
बारादरी इंस्पेक्टर को सौंपी गई निगरानी
शराब माफिया घोषित किए जाने के बाद गिरोह की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने की जिम्मेदारी बारादरी इंस्पेक्टर को दी गई है। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि गिरोह की आपराधिक गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
मनोज जायसवाल का नाम सहारनपुर डिस्टिलरी शराब घोटाले में भी सामने आ चुका है। इस मामले में उसे नामजद किया गया था और उसकी कुछ संपत्तियां भी पहले कुर्क की जा चुकी हैं। पुलिस का दावा है कि घोटाले में सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया था।
गैंगस्टर एक्ट में भी हुई थी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, शराब तस्करी और अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में मनोज जायसवाल, अजय जायसवाल सहित कई लोगों के खिलाफ पहले भी गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा चुकी है। गिरोह के खिलाफ विभिन्न जिलों में मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं।
अब संपत्तियों का होगा सत्यापन
पुलिस और प्रशासन अब मनोज जायसवाल एवं उसके सहयोगियों की चल-अचल संपत्तियों का दोबारा सत्यापन कर रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं अवैध शराब कारोबार से अर्जित धन से संपत्तियां तो नहीं बनाई गईं।
अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अवैध कमाई से संपत्ति अर्जित करने के प्रमाण मिलते हैं तो कुर्की और जब्ती की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
अन्य जिलों में भी हो सकती है कार्रवाई
खबर के अनुसार, गिरोह के कुछ सदस्यों के संबंध उन्नाव, आगरा, आजमगढ़ और लखनऊ सहित अन्य जिलों से भी जुड़े पाए गए हैं। ऐसे में संबंधित जिलों की पुलिस और प्रशासनिक इकाइयों से भी समन्वय कर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
एसएसपी का सख्त संदेश
एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि अवैध शराब, मादक पदार्थों और अन्य संगठित अपराधों से जुड़े माफियाओं के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। पुलिस ऐसे अपराधियों की पहचान कर उनकी अवैध संपत्तियों का चिन्हीकरण करेगी तथा कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
बड़ा सवाल
मनोज जायसवाल को शराब माफिया घोषित किए जाने और संपत्तियों की जांच शुरू होने के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और अवैध कारोबार से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ प्रशासन कितना बड़ा कदम उठाता है। यह कार्रवाई प्रदेश में संगठित अपराध और अवैध शराब कारोबार पर शिकंजा कसने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
झांसी और उन्नाव कनेक्शन की भी रही चर्चा
सूत्रों के अनुसार, कोरोना काल के दौरान झांसी और उन्नाव में पकड़ी गई अवैध शराब के मामलों में भी मनोज जायसवाल और उसके नेटवर्क का नाम चर्चा में आया था। आरोप लगाए गए थे कि सहारनपुर स्थित डिस्टिलरी से जुड़े शराब कारोबार का लाभ उठाते हुए विभिन्न जनपदों में अवैध शराब की आपूर्ति की गई। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायालय की प्रक्रिया के अधीन रही है।
अधिकारियों की भूमिका भी रही जांच के दायरे में
शराब घोटालों और अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में समय-समय पर आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। विभिन्न जांचों में यह भी देखा गया कि क्या विभागीय स्तर पर निगरानी में कमी अथवा अन्य कारणों से ऐसे नेटवर्क को बढ़ावा मिला। हालांकि किसी भी अधिकारी की जिम्मेदारी या दोष तय करना जांच एजेंसियों और न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विषय है।
शासन की सख्ती से बढ़ी माफियाओं की मुश्किलें
प्रदेश सरकार द्वारा अवैध शराब कारोबार के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपनाया गया है। शासन स्तर पर माफियाओं की संपत्तियों के चिन्हीकरण, कुर्की और आर्थिक नेटवर्क की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में शराब माफिया घोषित किए गए व्यक्तियों और उनके सहयोगियों की संपत्तियों तथा वित्तीय गतिविधियों की भी जांच तेज कर दी गई है।
बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शराब माफिया घोषित किए जाने के बाद क्या केवल नामित आरोपियों तक कार्रवाई सीमित रहेगी या फिर उन सभी लोगों और तंत्र की भी जांच होगी जिनकी भूमिका को लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। साथ ही यह भी देखना होगा कि अवैध शराब कारोबार से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।




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