
लखनऊ। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी नीति में अहम बदलाव करते हुए देशी शराब दुकानों की लाइसेंस व्यवस्था, शुल्क निर्धारण और कॉर्पोेट संचालन पर नए नियम लागू करने का फैसला किया है। नीति का उद्देश्य राजस्व बढ़ाना, पारदर्शिता लाना और अनियंत्रित विस्तार पर रोक लगाना बताया जा रहा है।
लाइसेंस फीस का नया फार्मूला
नई व्यवस्था के तहत देशी मदिरा दुकानों की बेसिक लाइसेंस फीस वार्षिक एम.जी.क्यू. (न्यूनतम गारंटीकृत मात्रा) का 32 प्रतिशत प्रति लीटर के आधार पर तय की जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक ₹1,000 की वृद्धि पर शुल्क उसी अनुपात में बढ़ेगा। इससे दुकानों की आय के अनुसार सरकार को सीधा राजस्व लाभ मिलेगा।
कॉर्पोरेट दुकानों पर अतिरिक्त बोझ
नीति में स्पष्ट किया गया है कि जिन दुकानों का संचालन कॉर्पोरेट मॉडल पर होगा, उनसे सामान्य दुकानों की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक न्यूनतम प्लस वार्षिक राजस्व (MGR) लिया जाएगा। यह कदम छोटे कारोबारियों के हित संरक्षण और कॉर्पोरेट वर्चस्व पर अंकुश के रूप में देखा जा रहा है।
3 किलोमीटर का दायरा अनिवार्य
यदि किसी क्षेत्र में 3 किलोमीटर के दायरे में पहले से कोई कम्पोजिट या मॉडल शॉप संचालित नहीं है, तभी नवीनीकरण की अनुमति दी जाएगी। इसका मकसद बाजार संतुलन और अति-संकेन्द्रण को रोकना है।
शुल्क संरचना में बड़ा परिवर्तन
पूर्व में 36 प्रतिशत तक प्रभावी पड़ने वाला शुल्क अब संशोधित ढांचे में बदलकर 27 प्रतिशत विशेष शुल्क/लाइसेंस फीस के रूप में संरचित किया गया है। सरकार का दावा है कि इससे राजस्व संरचना अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।
एमजीआर व्यवस्था से राजस्व सुनिश्चित
नई नीति में न्यूनतम गारंटीकृत वार्षिक राजस्व (MGR) का प्रावधान सख्ती से लागू रहेगा। यदि किसी दुकान की वास्तविक बिक्री अनुमान से कम रहती है, तब भी निर्धारित न्यूनतम राजस्व सरकार को देना होगा। इससे राजस्व में गिरावट की संभावना कम होगी।
नवीनीकरण सशर्त
2025-26 के अनुज्ञापियों का नवीनीकरण 2026-27 में तभी होगा, जब वे सभी शर्तों का पालन करेंगे। अनियमितता की स्थिति में नवीनीकरण स्वतः निरस्त माना जाएगा।
विश्लेषण:
नई आबकारी नीति साफ संकेत देती है कि सरकार राजस्व लक्ष्य को लेकर आक्रामक रणनीति अपना रही है। कॉर्पोरेट दुकानों पर अतिरिक्त भार, लाइसेंस फीस का प्रतिशत आधारित निर्धारण और एमजीआर की सख्ती — यह सब मिलकर 2026-27 में आबकारी आय को नई ऊंचाई पर पहुंचाने की तैयारी का संकेत देते हैं।
अब देखना होगा कि इन सख्त प्रावधानों का जमीनी असर कितना होता है और क्या छोटे कारोबारियों को इससे वास्तविक राहत मिलती है या प्रतिस्पर्धा और तीखी हो जाएगी।
1️⃣ लाइसेंस की अवधि और आवंटन प्रक्रिया
लाइसेंस वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी किए जाएंगे।
दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी प्रणाली से किया जाएगा।
पूर्व लाइसेंस स्वतः नवीनीकृत नहीं होंगे; सभी को नई प्रक्रिया से गुजरना होगा।
2️⃣ EDP (Earnest Deposit / सुरक्षा धनराशि)
प्रत्येक दुकान के लिए एक न्यूनतम EDP (सुरक्षा राशि) निर्धारित की गई है।
यह राशि दुकान की संभावित वार्षिक बिक्री (SKU – 180ML, 375ML, 750ML आदि बोतलों की संख्या) के आधार पर तय होगी।
अधिक बिक्री क्षमता वाली दुकान के लिए अधिक EDP जमा करनी होगी।
तालिका (टेबल) में अलग-अलग बिक्री स्लैब के अनुसार EDP की राशि निर्धारित की गई है।
सरल शब्दों में:
जिस दुकान की संभावित बिक्री ज्यादा होगी, उसकी सुरक्षा राशि भी ज्यादा होगी।
3️⃣ दुकानों की श्रेणी (कैटेगरी)
दुकानों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया गया है (जैसे शहरी, ग्रामीण, प्रमुख मार्ग आदि)।
हर श्रेणी के लिए अलग बिक्री लक्ष्य और शुल्क निर्धारित है।
श्रेणी के अनुसार लाइसेंस शुल्क और डिपॉज़िट तय होगा।
4️⃣ बिक्री लक्ष्य (सेल टारगेट)
प्रत्येक दुकान के लिए वार्षिक बिक्री लक्ष्य निर्धारित रहेगा।
यदि निर्धारित लक्ष्य से कम बिक्री होती है तो दंड या अन्य प्रशासनिक कार्रवाई संभव है।
5️⃣ लाइसेंस शुल्क और अन्य भुगतान
लाइसेंस प्राप्त करने के लिए निम्न भुगतान आवश्यक होंगे:
EDP (सुरक्षा राशि)
लाइसेंस शुल्क
संभवतः बैंक गारंटी
अन्य निर्धारित सरकारी शुल्क
कुछ स्थानों पर 10,000 / 15,000 / 1,00,000 रुपये जैसे स्लैब का उल्लेख है, जो संभवतः सुरक्षा या न्यूनतम शुल्क से संबंधित हैं।
6️⃣ संचालन से जुड़ी शर्तें
दुकान को निर्धारित सरकारी दर पर ही बिक्री करनी होगी।
ओवररेट या अवैध बिक्री पर सख्त कार्रवाई होगी।
स्टॉक और बिक्री का डिजिटल रिकॉर्ड रखना अनिवार्य हो सकता है।
विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जाएगा।
समग्र निष्कर्ष
यह पॉलिसी का भाग मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं को स्पष्ट करता है:
✔️ वर्ष 2026-27 की नई लाइसेंस प्रणाली
✔️ ई-लॉटरी द्वारा आवंटन
✔️ EDP (सुरक्षा राशि) का बिक्री आधारित निर्धारण
✔️ दुकानों की श्रेणी अनुसार शुल्क
✔️ बिक्री लक्ष्य और दंडात्मक प्रावधान
अवध भूमि न्यूज़ पर आबकारी पॉलिसी का विश्लेषण जारी है इसका अगला अंक कल प्रातः पब्लिश किया जाएगा💥




More Stories
सिर पर आस्था का कलश लिए निकली भव्य शोभायात्रा:
मुख्यालय परिसर में शराब पीकर हंगामा, महिला कर्मचारियों की सुरक्षा पर उठे सवाल:
नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने की अटकलों के बीच बेटे निशांत का बड़ा बयान, कहा—जबरन भेजा गया तो मैं पार्टी ज्वाइन नहीं करूंगा: