अवधभूमि

हिंदी न्यूज़, हिंदी समाचार

साप्ताहिक समीक्षा बैठक में तल्ख तेवर: जॉइंट एक्साइज कमिश्नर दिलीप मणि त्रिपाठी को आयुक्त की कड़ी फटकार, 2026 में आबकारी में करवट बदलेगा मौसम।

साप्ताहिक समीक्षा बैठक में तल्ख तेवर: जॉइंट एक्साइज कमिश्नर दिलीप मणि त्रिपाठी पर आयुक्त की फटकार, संकेत बदले समीकरणों के?
लखनऊ। साप्ताहिक समीक्षा बैठक में आबकारी आयुक्त का रुख इस बार बेहद सख्त रहा। मेरठ और लखनऊ जोन की जिम्मेदारी संभाल रहे जॉइंट एक्साइज कमिश्नर दिलीप मणि त्रिपाठी पर पुराने शराब स्टॉक के निस्तारण में देरी को लेकर आयुक्त जमकर बरसे। बैठक में आयुक्त ने साफ शब्दों में कहा—“आधा प्रदेश संभाल रहे हैं, फिर भी अब तक पुराने स्टॉक का निस्तारण क्यों नहीं हुआ?”
इस पर दिलीप मणि त्रिपाठी ने जवाब दिया कि “हमारी कोई जिला आबकारी अधिकारी नहीं सुनता।” जवाब आते ही बैठक का माहौल और गरमा गया। आयुक्त ने प्रतिवाद करते हुए मेरठ क्षेत्र के कमजोर राजस्व प्रदर्शन पर भी सवाल खड़े किए। आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि मेरठ जोन का रेवेन्यू प्रदेश में सबसे नीचे है, जबकि शराब तस्करी और अवैध बिक्री की शिकायतें सबसे ज्यादा मेरठ से आ रही हैं।
प्रमुख सचिव के सामने ही फटकार—संदेश साफ
बैठक में मौजूद प्रमुख सचिव के सामने ही जॉइंट एक्साइज कमिश्नर को फटकार लगना विभागीय हलकों में खास चर्चा का विषय बन गया। अब तक दिलीप मणि त्रिपाठी को प्रमुख सचिव का “विश्वासपात्र” माना जाता रहा है, ऐसे में सार्वजनिक मंच पर आयुक्त की नाराजगी को महज औपचारिक डांट नहीं माना जा रहा।
खबर का विश्लेषण
जवाबदेही का दबाव बढ़ा: पुराने स्टॉक का निस्तारण न होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि राजस्व और अवैध कारोबार—दोनों से जुड़ा मुद्दा है। आयुक्त का सख्त रुख यह संकेत देता है कि अब परिणाम-आधारित समीक्षा होगी।
मेरठ जोन पर फोकस: कमजोर रेवेन्यू और अधिक तस्करी—यह संयोजन सीधे जोनल नेतृत्व पर सवाल खड़े करता है। आने वाले हफ्तों में मेरठ में विशेष प्रवर्तन अभियान या प्रशासनिक फेरबदल संभव है।
सत्ता-संतुलन में बदलाव? प्रमुख सचिव के सामने फटकार लगना यह बताता है कि विभाग के भीतर शक्ति-संतुलन बदल सकता है। “लाडले” की छवि पर पहली बार औपचारिक खरोंच दिखी है।
संकेत साफ—कार्रवाई से नहीं हिचक: अगर अगले समीक्षा चक्र में सुधार नहीं दिखा, तो चेतावनी आगे बढ़कर अनुशासनात्मक कदम या जिम्मेदारियों में कटौती तक जा सकती है।
निष्कर्ष: बैठक में हुई यह फटकार केवल क्षणिक नाराजगी नहीं लगती। संकेत मिल रहे हैं कि आबकारी विभाग में जवाबदेही की कसौटी सख्त हो रही है। अब देखना होगा—क्या यह बदलाव सिर्फ मौसम का है, या सचमुच प्रशासनिक मौसम बदलने वाला है।

About Author