
अवध भूमि न्यूज़ की खबर का असर
आबकारी विभाग हरकत में, 80% मोलासेस इंडेंट पोर्टल पर हुए क्लियर
लखनऊ/प्रयागराज।
अवध भूमि न्यूज़ द्वारा मोलासेस उठान में हो रही देरी, दबाव और संभावित गड़बड़ियों को उजागर किए जाने के बाद आखिरकार आबकारी विभाग हरकत में आ गया है। खबर प्रकाशित होते ही विभागीय पोर्टल पर लंबित पड़े मोलासेस इंडेंट में से करीब 80 प्रतिशत इंडेंट क्लियर कर दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक कई दिनों से डिस्टलरी संचालक इंडेंट क्लियर न होने से परेशान थे। नियम के मुताबिक 24 घंटे के भीतर इंडेंट क्लियर होना चाहिए, लेकिन यह प्रक्रिया 5 से 15 दिनों तक बाधित रही, जिससे शराब उत्पादन ठप होने और सरकार को भारी राजस्व नुकसान की आशंका बनी हुई थी।
फेडरेशन का दबाव और ‘सब स्टैंडर्ड’ मोलासेस का आरोप
अवध भूमि न्यूज़ की पड़ताल में यह भी सामने आया था कि चीनी मिल फेडरेशन द्वारा डिस्टलरी पर सब स्टैंडर्ड (घटिया गुणवत्ता) मोलासेस उठाने का दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि गुणवत्तापूर्ण मोलासेस की बजाय ऐसे मोलासेस की सप्लाई के लिए अप्रत्यक्ष दबाव डाला गया, जिसे कई डिस्टलरी ने लेने से इनकार कर दिया।
यही वजह रही कि इंडेंट अटकाए गए और सिस्टम में जानबूझकर देरी की गई। खबर सामने आने के बाद अचानक पोर्टल पर गतिविधि तेज हुई और अधिकांश इंडेंट क्लियर कर दिए गए।
सवाल अब भी कायम
हालांकि 80% इंडेंट क्लियर होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन कई अहम सवाल अब भी जवाब मांग रहे हैं—
यदि सब कुछ नियमों के तहत था तो खबर से पहले इंडेंट क्यों अटके रहे?
क्या डिस्टलरी को घटिया मोलासेस लेने के लिए मजबूर किया जा रहा था?
देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
शेष 20% इंडेंट अब तक क्यों लंबित हैं?
खबर का असर, लेकिन जांच जरूरी
अवध भूमि न्यूज़ की खबर ने यह साफ कर दिया है कि मीडिया की निगरानी में सिस्टम तुरंत सक्रिय हो जाता है, लेकिन असली कसौटी तब होगी जब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अफसरों और संस्थाओं की भूमिका सामने लाई जाएगी।
फिलहाल इतना तय है कि अवध भूमि न्यूज़ की खबर ने आबकारी विभाग की जमी हुई फाइलों को हिला दिया है।
हूँ।




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