
जनरेटर में छिपाकर ले जाई जा रही थी 60 लाख की शराब, पुलिस ने पकड़ी 606 पेटियां; आबकारी विभाग पर उठे सवाल:
आगरा। नेशनल हाईवे के रास्ते फिल्मी अंदाज में तस्करी कर बिहार ले जाई जा रही अंग्रेजी शराब की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस ने जनरेटर के भीतर छिपाकर ले जाई जा रही 606 पेटियां अंग्रेजी शराब बरामद की हैं, जिनकी अनुमानित कीमत 60 से 62 लाख रुपये बताई जा रही है। मामले में दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई एत्मादपुर थाना क्षेत्र के छलेसर इलाके में शनिवार देर रात करीब 2:30 बजे की गई। डीसीपी पश्चिमी आदित्य कुमार ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि नेशनल हाईवे के रास्ते अवैध शराब की बड़ी खेप बिहार ले जाई जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने संदिग्ध ट्रक को रोककर जांच की।
जांच के दौरान ट्रक में एक बड़ा जनरेटर बॉक्स लगा मिला, जिसे ऊपर से तिरपाल से ढका गया था। पुलिस ने जब जनरेटर की बॉडी खुलवाकर जांच की तो उसके भीतर से 606 पेटियां अंग्रेजी शराब बरामद हुईं। तस्करों ने जनरेटर की मशीनरी निकालकर उसके खाली हिस्से में शराब की पेटियां भर दी थीं, ताकि चेकिंग के दौरान किसी को शक न हो।
पुलिस ने मौके से जगतार सिंह निवासी अमृतसर (पंजाब) और सुखपाल सिंह निवासी तरनतारण (पंजाब) को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे शराब की यह खेप भटिंडा से बिहार लेकर जा रहे थे। बिहार में शराबबंदी के कारण वहां अवैध शराब की कीमत अधिक मिलती है, इसलिए लंबे समय से इस तरह की तस्करी की जा रही थी।
एसीपी देवेश सिंह ने बताया कि तस्करों ने फिल्मी स्टाइल में ट्रक में शराब छिपाई थी। जनरेटर की बॉडी के अंदर शराब की पेटियां भर दी गई थीं, जिससे सामान्य चेकिंग में इसका पता लगाना बेहद मुश्किल था।
आबकारी विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
इतनी बड़ी मात्रा में शराब की खेप पकड़े जाने के बाद आबकारी विभाग की निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। माना जा रहा है कि यदि विभाग की चेकिंग और निगरानी व्यवस्था प्रभावी होती तो इतनी बड़ी मात्रा में शराब हाईवे तक नहीं पहुंच पाती।
सूत्रों का कहना है कि प्रदेश स्तर पर आबकारी व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रमुख सचिव आबकारी और क्षेत्रीय स्तर पर जॉइंट एक्साइज कमिश्नर आगरा जोन के अधीन होती है। वहीं जिले में शराब की बिक्री, परिवहन और निगरानी की सीधी जिम्मेदारी जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) की होती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी खेप किस तरह से बिना रोक-टोक के हाईवे तक पहुंच गई।
जांच की मांग
मामला सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर जांच की मांग भी उठने लगी है। जानकारों का कहना है कि यदि इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जाए तो यह भी सामने आ सकता है कि अवैध शराब तस्करी के पीछे किन लोगों का संरक्षण या मिलीभगत है।
फिलहाल पुलिस ने बरामद शराब और ट्रक को जब्त कर लिया है तथा गिरफ्तार तस्करों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही इस तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है।
शराब की खेप का असली ठिकाना सवालों के घेरे में
हालांकि पकड़े गए ट्रक चालक का दावा है कि शराब की खेप बिहार ले जाई जा रही थी, लेकिन सूत्रों का कहना है कि बरामद की गई यह शराब आगरा और उसके आसपास के जिलों में ही खपाने की तैयारी थी। जानकारों का मानना है कि बिहार का नाम लेकर तस्करी को अलग दिशा देने की कोशिश भी हो सकती है। यह संयोग है या कोई सोचा-समझा प्रयोग, फिलहाल कहना मुश्किल है। दिलचस्प बात यह भी है कि आगरा और मेरठ क्षेत्र के कई जिले इन दिनों आबकारी विभाग की राजस्व वसूली (रेवेन्यू कलेक्शन) के मामले में सबसे नीचे चल रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं अवैध शराब का समानांतर नेटवर्क तो सक्रिय नहीं, जिसकी वजह से सरकारी राजस्व पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जाए तो स्थानीय स्तर पर अवैध शराब के नेटवर्क और उसकी आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।




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