
अकोला में सियासी धमाका! 勞
मेयर बीजेपी का, बहुमत AIMIM के सहारे!
महाराष्ट्र के अकोला में जो हुआ, उसने सियासत के सारे पुराने समीकरण उलट दिए। मेयर बीजेपी का था, लेकिन हकीकत ये कि 33 सदस्यों वाले सदन में बीजेपी के पास सिर्फ 11 पार्षद थे। बहुमत के लिए चाहिए थे 17 सदस्य—और यहीं से शुरू हुई सियासी मजबूरी की कहानी।
बहुमत की तलाश में बेमेल गठबंधन
अपनी कुर्सी बचाने और परिषद पर पकड़ बनाए रखने के लिए बीजेपी ने अपने सबसे बड़े वैचारिक विरोधी AIMIM से हाथ मिला लिया।
यानि जिस पार्टी के खिलाफ मंचों से बयानबाज़ी होती रही, उसी के सहारे सत्ता का गणित पूरा किया गया।
ओवैसी फैक्टर ने बदला खेल
कहा जा रहा है कि ओवैसी की पार्टी AIMIM के समर्थन से ही बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा छुआ। सवाल यही है—क्या सत्ता के लिए सिद्धांत पीछे छूट गए?
राजनीति में संदेश साफ
अकोला की नगर परिषद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि
स्थानीय सत्ता में विचारधारा नहीं, संख्या बोलती है।
यह गठबंधन सिर्फ अकोला तक सीमित नहीं रहेगा—इसके राजनीतिक मायने दूर तक जाएंगे।
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