
लखनऊ, 31 मई 2026। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर विभाग (जीएसटी विभाग) में चल रही स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शासन द्वारा जारी एक नए आदेश के अनुसार विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण की समय-सीमा को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया गया है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब विभागीय स्तर पर बड़ी संख्या में तबादला प्रस्तावों पर कार्यवाही चल रही है और कई मामलों में प्रक्रिया अभी अधूरी है।
संयुक्त सचिव धर्मेंद्र मिश्रा द्वारा जारी पत्र में राज्य कर आयुक्त को निर्देशित किया गया है कि विस्तारित समय-सीमा के भीतर स्थानांतरण से संबंधित समस्त आवश्यक कार्यवाही पूर्ण कर ली जाए। आदेश के अनुसार यह निर्णय कार्मिक विभाग की वार्षिक स्थानांतरण नीति 2026-27 के प्रावधानों के तहत लिया गया है।
शासन ने क्यों बढ़ाई समय-सीमा?
शासन के पत्र में कहा गया है कि कार्मिक विभाग द्वारा 5 मई 2026 को जारी वार्षिक स्थानांतरण नीति के संदर्भ में विचार-विमर्श के बाद यह महसूस किया गया कि राज्य कर विभाग में स्थानांतरण की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। इसी कारण विभाग को विशेष छूट देते हुए स्थानांतरण की अवधि 15 जून तक बढ़ा दी गई।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि प्रदेश भर में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की बड़ी संख्या, विभिन्न श्रेणियों के दावों, स्पाउस ग्राउंड, चिकित्सा आधार, प्रशासनिक आवश्यकता तथा रिक्त पदों के समायोजन जैसे मामलों के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया अपेक्षा से अधिक समय ले रही थी।
हजारों कर्मचारियों पर पड़ेगा असर
राज्य कर विभाग प्रदेश के सबसे बड़े राजस्व विभागों में से एक है। विभाग के विभिन्न जोन, मंडलों और जनपदों में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं। स्थानांतरण अवधि बढ़ने से उन कर्मचारियों को राहत मिलने की संभावना है जिनके आवेदन अभी विचाराधीन हैं या जिनके संबंध में अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका है।
सूत्रों के अनुसार कई अधिकारी अपने पसंदीदा जनपदों अथवा पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं। वहीं विभाग को भी प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित करनी है।
लंबित प्रस्तावों को मिलेगा अवसर
तबादला प्रक्रिया की समय-सीमा बढ़ने का सबसे बड़ा लाभ उन मामलों को मिलेगा जो अभी तक किसी कारणवश लंबित हैं। कई प्रकरणों में दस्तावेजों की जांच, रिक्त पदों का सत्यापन, वरिष्ठता का परीक्षण और विभागीय अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी।
अब अतिरिक्त समय मिलने से विभाग इन मामलों का निस्तारण अधिक व्यवस्थित ढंग से कर सकेगा। इससे जल्दबाजी में निर्णय लेने की आवश्यकता भी कम होगी और पात्र कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
विभागीय हलकों में बढ़ी हलचल
शासन का आदेश जारी होते ही राज्य कर विभाग के विभिन्न कार्यालयों में तबादलों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को उम्मीद थी कि स्थानांतरण सूची शीघ्र जारी होगी, वे अब 15 जून तक प्रक्रिया जारी रहने की संभावना को लेकर नए समीकरण तलाश रहे हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि अतिरिक्त समय मिलने के बाद कई लंबित प्रस्तावों पर पुनर्विचार भी किया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय विभागीय आवश्यकता और स्थानांतरण नीति के प्रावधानों के अनुसार ही लिया जाएगा।
क्या संकेत देता है यह आदेश?
विशेषज्ञों का मानना है कि शासन का यह निर्णय केवल समय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि सरकार स्थानांतरण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और नीति आधारित तरीके से पूरा करना चाहती है। यदि किसी विभाग में बड़ी संख्या में मामले लंबित हों या प्रशासनिक जटिलताएं हों तो समय-सीमा बढ़ाना एक व्यावहारिक कदम माना जाता है।
हालांकि अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विस्तारित अवधि के दौरान राज्य कर विभाग कितने बड़े पैमाने पर स्थानांतरण आदेश जारी करता है और किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नई तैनाती मिलती है।
आदेश की प्रमुख बातें
- राज्य कर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण की अवधि बढ़ाई गई।
- संयुक्त सचिव धर्मेंद्र मिश्रा ने आदेश जारी किया।
- कार्मिक विभाग की स्थानांतरण नीति 2026-27 के तहत निर्णय लिया गया।
- नई अंतिम तिथि 15 जून 2026 निर्धारित की गई।
- राज्य कर आयुक्त को विस्तारित अवधि में सभी आवश्यक कार्यवाही पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
- लंबित तबादला मामलों के निस्तारण की संभावना बढ़ी।
कुल मिलाकर, शासन के इस निर्णय से राज्य कर विभाग में चल रही तबादला प्रक्रिया को नई गति मिलने की उम्मीद है और अब अगले दो सप्ताह विभागीय गतिविधियों तथा संभावित स्थानांतरण आदेशों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।




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