सामने आया हैरान कर देने वाला कारनामा:

लखनऊ। लोकायुक्त की रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के दोषी पाए गए आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह अपनी बदनाम छवि के अनुरूप ही काम कर रहे हैं। इनका एक ऐसा कारनामा सामने आया है जो हैरान कर देगा। पता चला है कि विभाग के सभी भ्रष्टाचार और अनियमितता में लिप्त रहने वाले पूर्व जॉइंट एक्साइज कमिश्नर हरिश्चंद्र श्रीवास्तव और गिरीश चंद्र मिश्रा जो कि एक कंपनी की ओर से ठेके पर काम कर रहे हैं आप उनको कमिश्नर के आदेश पर उनका भुगतान पेमेंट मेमो के जरिए हो रहा है जो की नियमित कर्मचारियों को दिया जाता है मतलब यह की चोर दरवाजे से इन दोनों अधिकारियों को अब नियमित वेतनमान दिया जा रहा है यह सब वित्त नियंत्रक की मिली भगत से भी हो रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक या भुगतान जनवरी माह से लगातार जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे दागी अधिकारियों पर आबकारी विभाग और कमिश्नर क्यों मेहरबान है। यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच हुई तो कमिश्नर को लेने के देने पड़ सकते हैं।
गिरीश चंद्र मिश्रा द्वारा कुछ डिक्शनरी से अवैध वसूली की भी चर्चा है। कहां यह भी जा रहा है कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है। इसी तरह हरिश्चंद्र श्रीवास्तव पर भी गंभीर अनियमितता का आरोप है।




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