
प्रदेश में मोलासेस (शीरा) की भारी किल्लत ने शराब उद्योग को संकट में डाल दिया है। कई डिस्टलरी बंद होने के कगार पर पहुंच गई हैं और उत्पादन ठप होने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। आरोप है कि एक ओर जहां आबकारी विभाग के शीर्ष स्तर पर ढाई लाख कुंतल मोलासेस को “सरप्लस” दिखाकर अपने करीबी कारोबारी झुनझुनवाला के माध्यम से नाइजीरिया निर्यात कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की देसी शराब बनाने वाली डिस्टलरियों को पर्याप्त मोलासेस नहीं मिल पा रहा है।
सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि इस कृत्रिम कमी के चलते डिस्टलरियों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उद्योग से जुड़े लोग दबी जुबान में आरोप लगा रहे हैं कि डिप्टी आबकारी आयुक्त (उत्पादन) संजीव कांत शर्मा पर गंभीर आरोप हैं कि वे मोलासेस आवंटन में प्रति कुंतल ₹25 से ₹40 तक कमीशन की मांग कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि जब तक यह “डील” तय नहीं होती, तब तक मोलासेस की इंडेंट (मांग) को मंजूरी नहीं दी जा रही।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि 25 मार्च से आबकारी विभाग के पोर्टल पर डिस्टलरियों द्वारा डाले गए इंडेंट लंबित पड़े हैं और उनका निस्तारण नहीं हो रहा है, जिससे पूरे उद्योग में असंतोष और अनिश्चितता का माहौल बन गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इंडेंट प्रक्रिया को बाधित क्यों किया जा रहा है? क्या यह सब आबकारी आयुक्त के इशारे पर हो रहा है, या फिर विभागीय स्तर पर किसी बड़े खेल का हिस्सा है? इस मुद्दे को लेकर विभाग के भीतर और बाहर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अगर जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो न केवल डिस्टलरियों का उत्पादन ठप हो सकता है, बल्कि इससे प्रदेश के राजस्व पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है।




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