
“STOK BEER” मामले में बड़ा सवाल: क्या आरोपी अफसर ही करेंगे जांच?
BIS मानकों की अनदेखी, गुणवत्ता पर सवाल और जनस्वास्थ्य की चिंता के बीच जांच समिति गठन पर उठे गंभीर सवाल
इंदौर। कई राज्यों में बड़े पैमाने पर बिक रही “हाई रेंज” STOK BEER को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। बियर की गुणवत्ता, BIS मानकों के कथित उल्लंघन, निर्माण प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं और जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर सवालों के बीच आबकारी विभाग ने जांच समिति का गठन तो कर दिया है, लेकिन समिति की संरचना को लेकर ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस इंदौर आबकारी अमले के अधिकारक्षेत्र में संबंधित बियर फैक्ट्री (ब्रेवरी) संचालित हो रही है, उसी क्षेत्र के अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई? अब यह मुद्दा केवल एक बियर ब्रांड तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि आबकारी विभाग की निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
मामले में शिकायत और समाचार प्रकाशित होने के बाद आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने कार्रवाई करते हुए जांच के निर्देश दिए। इसके बाद उपायुक्त आबकारी, संभागीय उड़नदस्ता इंदौर इंदरसिंह जामोद द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति का नेतृत्व इंदौर एसी अभिषेक तिवारी को सौंपा गया है तथा एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
लेकिन जांच समिति के गठन के तुरंत बाद ही विभागीय गलियारों और शराब कारोबार से जुड़े हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या यह जांच वास्तव में निष्पक्ष हो पाएगी? आलोचकों का कहना है कि यदि संबंधित फैक्ट्री वर्षों से उसी क्षेत्रीय निगरानी तंत्र के अंतर्गत संचालित हो रही थी, तो अब उसी तंत्र के अधिकारियों द्वारा जांच किया जाना हितों के टकराव (Conflict of Interest) जैसा मामला प्रतीत होता है।
“अपने ही सिस्टम की जांच खुद” वाली स्थिति?
मामले को लेकर कई पूर्व अधिकारियों और जानकारों का कहना है कि यदि फैक्ट्री में BIS मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण या निर्माण प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई होगी, तो स्थानीय आबकारी और निरीक्षण व्यवस्था की भूमिका पर भी प्रश्न उठेंगे। ऐसे में वही अधिकारी यदि जांच करेंगे तो स्वाभाविक रूप से जांच की विश्वसनीयता प्रभावित होगी।
यही कारण है कि अब यह मांग उठने लगी है कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, बाहरी संभागीय टीम या राज्य स्तरीय विशेष समिति से कराई जानी चाहिए, ताकि रिपोर्ट पर जनता और उपभोक्ताओं का भरोसा कायम रह सके।
जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला, इसलिए बढ़ी गंभीरता
विशेषज्ञों का कहना है कि शराब या बियर की गुणवत्ता से जुड़ा मामला केवल कारोबारी विवाद नहीं होता, बल्कि सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय होता है। यदि किसी उत्पाद में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी, निर्धारित मानकों से विचलन या निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही पाई जाती है, तो उसका असर हजारों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
इसी वजह से STOK BEER को लेकर उठे सवालों को गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि यह ब्रांड कई राज्यों में व्यापक स्तर पर बाजार में उपलब्ध है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उत्पाद की गुणवत्ता और मानकों के पालन को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
BIS मानकों पर क्यों उठ रहे सवाल?
मामले में BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) मानकों के कथित उल्लंघन की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। जानकारों के अनुसार खाद्य एवं पेय पदार्थों के निर्माण में गुणवत्ता, शुद्धता, उत्पादन प्रक्रिया, पैकेजिंग और सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
यदि किसी उत्पाद में मानकों का पालन नहीं होता या जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है, तो इससे कंपनी के साथ-साथ संबंधित निगरानी एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठ सकते हैं। हालांकि अभी जांच पूरी नहीं हुई है और विभागीय रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
कार्रवाई के बाद विभागीय हलचल तेज
जांच समिति के गठन के बाद आबकारी विभाग में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार संबंधित दस्तावेज, उत्पादन रिकॉर्ड, गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े अभिलेख और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की तैयारी की जा रही है।
वहीं दूसरी ओर, शराब कारोबार और प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई स्तरों पर जवाबदेही तय हो सकती है। यही वजह है कि यह मामला अब केवल एक ब्रांड की जांच नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की विश्वसनीयता की परीक्षा माना जा रहा है।
विपक्ष और सामाजिक संगठनों की नजर
मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों का भी ध्यान खींचना शुरू कर दिया है। कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि मामला जनस्वास्थ्य से जुड़ा है तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। वहीं विपक्षी दल भी आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर सरकार और आबकारी विभाग को घेर सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही…
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एक सप्ताह में गठित समिति अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष देती है। क्या जांच वास्तव में निष्पक्ष और पारदर्शी होगी? क्या STOK BEER की गुणवत्ता और मानकों को लेकर उठे सवालों का स्पष्ट जवाब मिलेगा? या फिर यह मामला भी केवल औपचारिक जांच तक सीमित रह जाएगा?
फिलहाल इतना तय है कि “हाई रेंज” STOK BEER विवाद ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और जांच तंत्र — तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।




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