
**आबकारी निरीक्षक को निजी सहायक बनाए जाने पर विभाग में हड़कंप
अमित अग्रवाल की नियुक्ति को ‘नियम विरुद्ध’ बताकर उठे गंभीर सवाल**
लखनऊ। जोरदार चर्चा है कि आबकारी विभाग में निरीक्षक अमित अग्रवाल को आबकारी आयुक्त का निजी सहायक (Personal Assistant / PA) बनाए जाने के आदेश ने विभाग के अंदर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। विभागीय कर्मचारियों और शिकायतकर्ताओं ने इस नियुक्ति को सीधे-सीधे नियम विरुद्ध बताया है और कहा है कि यह पोस्टिंग कैडर नियमों, यो
मुख्य विवाद: ‘निजी सहायक’ का पद स्टेनोग्राफर कैडर का होता है
शिकायतकर्ताओं के अनुसार—
① PA / Private Secretary का पद विशेष कौशल वाला पद होता है
- यह पद स्टेनोग्राफर (Steno / PA Cadre) के लिए निर्धारित है।
- शॉर्टहैंड, टाइपिंग दक्षता, नोटिंग-ड्राफ्टिंग और कैडर-विशिष्ट योग्यता इसमें अनिवार्य होती है।
② निरीक्षक कैडर का अधिकारी इस पद के लिए अयोग्य माना जाता है
- आबकारी निरीक्षक फील्ड इंस्पेक्शन, प्रवर्तन और लाइसेंसिंग से जुड़े कैडर के अधिकारी हैं।
- उन्हें PA कैडर के पद पर तैनात करना सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन बताया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने कौन-कौन से नियम उल्लंघन बताए?
1. कैडर स्ट्रक्चर का उल्लंघन
- स्टेनो कैडर के पद पर निरीक्षक की तैनाती UP Excise Service Manual की मूल भावना के विरुद्ध बताई गई है।
2. योग्यता मानकों की अनदेखी
- PA पद के लिए आवश्यक शॉर्टहैंड और टाइपिंग योग्यता को पूरी तरह दरकिनार किया गया।
3. चयन/पैनल प्रक्रिया का पालन नहीं
- सामान्यतः PA पद पर तैनाती—
- रिक्ति सूचित,
- कैडर अनुसार चयन,
- या वरिष्ठता/योग्यता वाले स्टेनोग्राफर से होती है।
- शिकायत के अनुसार इन तीनों प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
4. विभागीय पारदर्शिता नियमों का उल्लंघन
- न तो प्रस्ताव जारी हुआ,
- न चयन पैनल,
- न ही कोई औपचारिक औचित्य दर्ज किया गया।
शिकायतकर्ताओं ने कहा कि आदेश ऐसा प्रतीत होता है जैसे उसे व्यक्तिगत सुविधा के लिए जारी किया गया हो, न कि “नियम आधारित प्रशासन” के लिए।
मुख्यालय को ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ की तरह चलाने का आरोप
कुछ कर्मचारियों ने टिप्पणी की है कि इस तरह के मनमाने आदेशों से ऐसा लगता है कि—
“मुख्यालय को नियमों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पसंद-नापसंद से चलाया जा रहा है।”
कार्रवाई की माँग
शिकायतकर्ताओं ने शासन से माँग की है कि—
- इस नियुक्ति की नियम-संगतता की जाँच हो,
- आदेश की रीव्यू/रद्दीकरण प्रक्रिया शुरू की जाए,
- और जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।




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