
कानपुर से एक बड़ा GST घोटाला सामने आया है, जिसने राज्य कर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गोविंद नगर क्षेत्र में कागजों पर फर्म खड़ी कर करोड़ों रुपये के फर्जी लेन-देन दिखाकर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया।
क्या है पूरा मामला?
राज्य कर विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि एक फर्म, जो सिर्फ दस्तावेजों में मौजूद थी, उसने वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 204 करोड़ रुपये की खरीद और 206 करोड़ रुपये की बिक्री दर्शाई।
इस फर्जी कारोबार के जरिए:
करीब 36.74 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लिया गया
और 37.13 करोड़ रुपये का बोगस ITC अन्य फर्मों में ट्रांसफर कर दिया गया
यानि बिना किसी वास्तविक व्यापार के सिर्फ कागजी खेल से करोड़ों का टैक्स घोटाला अंजाम दिया गया।
जांच में क्या मिला?
जब विभागीय टीम 13 जनवरी को मौके पर पहुंची, तो:
फर्म का पता बंद दुकान निकला
वहां कोई बोर्ड या व्यावसायिक गतिविधि नहीं थी
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर भी या तो बंद मिले या रिस्पॉन्स नहीं मिला
इससे साफ हो गया कि फर्म पूरी तरह से फर्जी थी और सिर्फ GST फ्रॉड के लिए बनाई गई थी।
आरोपी कौन है?
इस पूरे मामले में अरविंद सिंह का नाम सामने आया है, जो मुरादाबाद का रहने वाला है।
इसी व्यक्ति ने 28 फरवरी को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म का रजिस्ट्रेशन कराया था।
पुलिस कार्रवाई
गोविंद नगर थाने के प्रभारी रीकेश कुमार सिंह के अनुसार:
आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में FIR दर्ज कर ली गई है
मामले की जांच जारी है और आगे और भी खुलासे हो सकते हैं
⚠️ बड़ा सवाल: विभाग की भूमिका पर उठे प्रश्न
यह मामला सिर्फ एक फर्जी फर्म का नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी का भी संकेत देता है:
बिना भौतिक सत्यापन के इतना बड़ा टर्नओवर कैसे दिखा दिया गया?
GST पोर्टल पर करोड़ों के ट्रांजेक्शन का अलर्ट क्यों नहीं आया?
क्या इसमें और फर्मों की मिलीभगत है?
संभावित बड़ा नेटवर्क
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में अक्सर:
कई फर्जी फर्मों का नेटवर्क होता है
ITC को एक से दूसरी फर्म में घुमाकर टैक्स चोरी की जाती है
और अंत में फर्म बंद कर दी जाती है
अगर गहराई से जांच हुई, तो यह घोटाला सिर्फ 37 करोड़ नहीं, बल्कि सैकड़ों करोड़ तक पहुंच सकता है।
茶 निष्कर्ष
कानपुर का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि GST सिस्टम में अभी भी फर्जी ITC और बोगस फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी संभव है। अब नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को कितनी गहराई से उजागर कर पाती हैं।




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