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आबकारी विभाग में ट्रांसफर का “महाखेल” आज? मुख्यालय छोड़ लखनऊ पहुंचे बड़े अफसर, पारदर्शिता पर उठे सवाल

लखनऊ/प्रयागराज।
उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग में तबादला सत्र को लेकर हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक आज की रात कई अधिकारियों और निरीक्षकों के भविष्य का फैसला करने वाली साबित हो सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब विभाग का अधिकृत मुख्यालय प्रयागराज में है और लखनऊ में आबकारी विभाग का कोई अधिकृत ट्रांसफर कार्यालय नहीं है, तब आखिर किसकी अनुमति से विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी राजधानी में डेरा डाले हुए हैं?

सूत्रों का दावा है कि आबकारी आयुक्त कार्यालय से जुड़े कई अहम अधिकारी—जिनमें कमिश्नर कार्यालय से संबद्ध अधिकारी, एडिशनल स्तर के अधिकारी, कार्मिक शाखा, टास्क फोर्स, ईआईबी और स्टैटिक विंग से जुड़े लोग शामिल बताए जा रहे हैं—इन दिनों लखनऊ में सक्रिय हैं। इससे पूरे ट्रांसफर प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

“वसूली ऑपरेशन” की चर्चा तेज

विभागीय गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा निरंकार पांडे को लेकर है। सूत्रों के अनुसार त्रिवेणी जिला में तैनात निरंकार पांडे को विशेष रूप से लखनऊ बुलाए जाने की बातें कही जा रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर उनकी मौजूदगी किस उद्देश्य से है? क्या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया है या फिर ट्रांसफर सत्र के नाम पर कोई “विशेष प्रबंधन” चल रहा है?

इतना ही नहीं, आबकारी आयुक्त के पीए अमित अग्रवाल के भी लखनऊ में सक्रिय होने की चर्चा तेज है। सूत्रों के मुताबिक ट्रांसफर सूची को अंतिम रूप देने के लिए राजधानी में लगातार बैठकों और बंद कमरों में मंथन का दौर चल रहा है।

ऑनलाइन ट्रांसफर या फिर “मैनेजमेंट सिस्टम”?

इस बार विभाग लगातार ऑनलाइन और पारदर्शी ट्रांसफर नीति की बात करता रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और संकेत दे रही है। जानकारी के मुताबिक निरीक्षकों के लगभग 160 पदों के सापेक्ष केवल करीब 140 पदों पर ही विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। इससे कई निरीक्षकों में नाराजगी है और सवाल उठ रहा है कि यदि सभी रिक्त पद विकल्प सूची में नहीं हैं तो ऑनलाइन प्रक्रिया की निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी?

विभागीय सूत्रों का कहना है कि अभी तक यह भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि अंतिम ट्रांसफर सूची वास्तव में ऑनलाइन प्रक्रिया से जारी होगी या फिर अंतिम समय में ऑफलाइन “एडजस्टमेंट” कर दिए जाएंगे। यही कारण है कि राजधानी में चल रही गतिविधियों को लेकर शक और बढ़ गया है।

महिला अधिकारियों की एंट्री से नई चर्चा

इस बीच एक और बड़ी चर्चा सहायक आबकारी आयुक्त पदों की संभावित सूची को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि पहली बार दो महिला निरीक्षकों को सहायक आबकारी आयुक्त बनाए जाने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि प्रमुख सचिव स्तर से दो महिला इंस्पेक्टर समेत कुल तीन नाम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

यदि ऐसा होता है तो यह विभागीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा, लेकिन इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि चयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी और क्या वरिष्ठता एवं पात्रता का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

आज आ सकती है बड़ी सूची

सूत्रों के अनुसार ट्रांसफर का पूरा “खेल” आज रात ही निपटाया जा सकता है। कई अधिकारी राजधानी के होटलों और निजी ठिकानों पर सक्रिय बताए जा रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों के बीच यह चर्चा आम है कि सूची जारी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष रही या फिर प्रभाव और पहुंच के आधार पर तबादलों का समीकरण तय किया गया।

फिलहाल पूरे विभाग की नजर आज रात जारी होने वाली संभावित सूची पर टिकी है। यदि आरोपों के बीच सूची जारी होती है तो आने वाले दिनों में यह मामला बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद भी बन सकता है।

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