
बांदा। आबकारी विभाग के महत्वपूर्ण पद डिप्टी एक्साइज कमिश्नर बांदा की करीब तीन माह से कार्यालय में नियमित उपस्थिति न होने की चर्चाओं के बीच विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े होने लगे हैं। यदि किसी मंडलीय स्तर के अधिकारी की लंबे समय तक अनुपस्थिति रहती है तो इससे प्रशासनिक, वित्तीय और अनुश्रवण संबंधी अनेक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
आबकारी विभाग के जानकारों का कहना है कि डिप्टी एक्साइज कमिश्नर स्तर के अधिकारी केवल औपचारिक पदाधिकारी नहीं होते, बल्कि राजस्व वसूली, विभागीय नियंत्रण, निरीक्षण और प्रशासनिक निर्णयों की पूरी श्रृंखला में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
कौन-कौन से कार्य हो सकते हैं प्रभावित
1. अधीनस्थ अधिकारियों की निगरानी और नियंत्रण
डिप्टी एक्साइज कमिश्नर मंडल के अंतर्गत आने वाले आबकारी निरीक्षकों और अन्य कर्मचारियों के कार्यों की समीक्षा करते हैं। उनकी अनुपस्थिति में फील्ड स्तर की निगरानी कमजोर पड़ सकती है।
2. अवैध शराब के खिलाफ अभियान की समीक्षा
अवैध शराब निर्माण, तस्करी और बिक्री रोकने के लिए चलाए जा रहे अभियानों की नियमित समीक्षा तथा दिशा-निर्देश देने का दायित्व वरिष्ठ अधिकारी का होता है। लंबे समय तक अनुपस्थिति से इन अभियानों की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
3. राजस्व वसूली की मॉनिटरिंग
सरकार को मिलने वाले आबकारी राजस्व की नियमित समीक्षा, लक्ष्य प्राप्ति की निगरानी तथा आवश्यक निर्देश देना महत्वपूर्ण दायित्व है। अधिकारी की अनुपस्थिति में राजस्व संबंधी समीक्षा प्रभावित हो सकती है।
4. विभागीय पत्रावलियों और महत्वपूर्ण अनुमोदन
कई मामलों में वरिष्ठ स्तर की संस्तुति, टिप्पणी अथवा अनुमोदन आवश्यक होता है। ऐसे प्रकरण लंबित होने की आशंका बढ़ सकती है।
5. सेवा संबंधी मामलों का निस्तारण
अधीनस्थ कर्मचारियों के सेवा सत्यापन, गोपनीय प्रविष्टियां, अवकाश संबंधी प्रकरण, विभागीय जांच और अन्य प्रशासनिक मामलों में वरिष्ठ अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
6. शिकायतों की सुनवाई
जन शिकायतों तथा विभागीय शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है, जिससे मामलों का लंबित होना स्वाभाविक है।
7. निरीक्षण और औचक जांच
गोदामों, अनुज्ञापियों, शराब दुकानों और विभागीय कार्यालयों का निरीक्षण वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा किया जाता है। लंबे समय तक निरीक्षण न होने से अनियमितताओं की संभावना बढ़ सकती है।
8. शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्टें
विभागीय प्रगति, राजस्व स्थिति और विशेष अभियानों से संबंधित रिपोर्टों के परीक्षण और अग्रसारण का कार्य भी प्रभावित हो सकता है।
9. विभागीय अनुशासन पर असर
वरिष्ठ अधिकारी की अनुपस्थिति से अधीनस्थ कर्मचारियों में जवाबदेही और अनुशासन संबंधी प्रश्न खड़े हो सकते हैं।
10. संवेदनशील मामलों में निर्णय
लाइसेंस, प्रवर्तन कार्रवाई, विवादित मामलों और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में वरिष्ठ स्तर की भूमिका आवश्यक होती है। ऐसे मामलों के लंबित रहने की आशंका रहती है।
उठ रहे हैं कई सवाल
यदि वास्तव में डिप्टी एक्साइज कमिश्नर लंबे समय से कार्यालय में उपस्थित नहीं हैं तो सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि—
- विभागीय फाइलों का निस्तारण कौन कर रहा है?
- सेवा सत्यापन और प्रशासनिक अनुमोदन किस स्तर पर हो रहे हैं?
- निरीक्षण रिपोर्टों की समीक्षा कौन कर रहा है?
- राजस्व लक्ष्य की निगरानी कौन कर रहा है?
- अधीनस्थ अधिकारियों की जवाबदेही किसके प्रति निर्धारित है?
- शासन को भेजी जाने वाली रिपोर्टों का परीक्षण कौन कर रहा है?
- क्या अधिकारी अवकाश पर हैं, प्रशिक्षण पर हैं अथवा किसी अन्य प्रशासनिक दायित्व में तैनात हैं?
- यदि अनुपस्थित हैं तो उनके कार्यों का वैकल्पिक प्रभार किस अधिकारी को सौंपा गया है?
ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर (प्रभारी) आगरा के दायित्वों पर भी उठ रहे गंभीर सवाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर (प्रभारी) आगरा के रूप में तैनात अधिकारी लंबे समय से कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हैं और कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज में भी उनकी उपस्थिति दिखाई नहीं दे रही है, तो यह स्थिति केवल बांदा मंडल तक सीमित नहीं रह जाती बल्कि आगरा क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर स्तर का अधिकारी क्षेत्रीय आबकारी व्यवस्था की निगरानी, प्रवर्तन अभियानों की समीक्षा, अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों का मूल्यांकन, राजस्व वसूली की प्रगति की समीक्षा तथा शासन को भेजी जाने वाली महत्वपूर्ण रिपोर्टों के परीक्षण का दायित्व निभाता है। ऐसे में लंबे समय तक अनुपस्थिति की स्थिति में इन कार्यों के प्रभावित होने की आशंका स्वाभाविक है।
क्या आगरा क्षेत्र में भी केवल दूरभाष और व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा प्रशासन?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि प्रभारी ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं तो महत्वपूर्ण फाइलों, निरीक्षण आख्या, प्रवर्तन रिपोर्ट, विभागीय शिकायतों और प्रशासनिक अनुमोदनों का परीक्षण किस प्रकार किया जा रहा है? क्या अधीनस्थ अधिकारी केवल मोबाइल फोन, व्हाट्सएप अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से निर्देश प्राप्त कर कार्यवाही कर रहे हैं? यदि ऐसा है तो विभागीय जवाबदेही, अभिलेखीय पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया की वैधानिकता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
उत्पन्न हो सकती हैं ये प्रशासनिक विसंगतियां
वरिष्ठ स्तर की प्रभावी निगरानी के अभाव में निम्न प्रकार की परिस्थितियां पैदा होने की आशंका व्यक्त की जा रही है—
- प्रवर्तन एवं छापेमारी कार्यवाहियों की स्वतंत्र समीक्षा का अभाव।
- अवैध शराब के खिलाफ अभियानों की प्रभावशीलता में कमी।
- अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों की जवाबदेही कमजोर पड़ना।
- संवेदनशील मामलों में निर्णय लेने में अनावश्यक विलंब।
- राजस्व वसूली और लक्ष्य प्राप्ति की समीक्षा प्रभावित होना।
- विभागीय शिकायतों और अनुशासनात्मक मामलों का लंबित होना।
- निरीक्षण रिपोर्टों और जांच आख्या की गुणवत्ता पर प्रश्न उठना।
- क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच समन्वय में कमी आना।
- शासन के निर्देशों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति की निगरानी प्रभावित होना।
शासन से स्पष्टीकरण की मांग
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि अधिकारी वास्तव में लंबे समय से बांदा और आगरा दोनों कार्यालयों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हैं तो उनके दायित्वों का निर्वहन कौन कर रहा है? क्या किसी अन्य अधिकारी को विधिवत प्रभार सौंपा गया है, या फिर पूर
ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर (प्रभारी) आगरा के दायित्वों पर भी उठ रहे गंभीर सवाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार यदि ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर (प्रभारी) आगरा के रूप में तैनात अधिकारी लंबे समय से कार्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हैं और कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज में भी उनकी उपस्थिति दिखाई नहीं दे रही है, तो यह स्थिति केवल बांदा मंडल तक सीमित नहीं रह जाती बल्कि आगरा क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर स्तर का अधिकारी क्षेत्रीय आबकारी व्यवस्था की निगरानी, प्रवर्तन अभियानों की समीक्षा, अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों का मूल्यांकन, राजस्व वसूली की प्रगति की समीक्षा तथा शासन को भेजी जाने वाली महत्वपूर्ण रिपोर्टों के परीक्षण का दायित्व निभाता है। ऐसे में लंबे समय तक अनुपस्थिति की स्थिति में इन कार्यों के प्रभावित होने की आशंका स्वाभाविक है।
क्या आगरा क्षेत्र में भी केवल दूरभाष और व्हाट्सएप के भरोसे चल रहा प्रशासन?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि प्रभारी ज्वाइंट एक्साइज कमिश्नर कार्यालय में उपलब्ध नहीं हैं तो महत्वपूर्ण फाइलों, निरीक्षण आख्या, प्रवर्तन रिपोर्ट, विभागीय शिकायतों और प्रशासनिक अनुमोदनों का परीक्षण किस प्रकार किया जा रहा है? क्या अधीनस्थ अधिकारी केवल मोबाइल फोन, व्हाट्सएप अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से निर्देश प्राप्त कर कार्यवाही कर रहे हैं? यदि ऐसा है तो विभागीय जवाबदेही, अभिलेखीय पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया की वैधानिकता पर भी सवाल उठ सकते हैं।
उत्पन्न हो सकती हैं ये प्रशासनिक विसंगतियां
वरिष्ठ स्तर की प्रभावी निगरानी के अभाव में निम्न प्रकार की परिस्थितियां पैदा होने की आशंका व्यक्त की जा रही है—
- प्रवर्तन एवं छापेमारी कार्यवाहियों की स्वतंत्र समीक्षा का अभाव।
- अवैध शराब के खिलाफ अभियानों की प्रभावशीलता में कमी।
- अधीनस्थ अधिकारियों के कार्यों की जवाबदेही कमजोर पड़ना।
- संवेदनशील मामलों में निर्णय लेने में अनावश्यक विलंब।
- राजस्व वसूली और लक्ष्य प्राप्ति की समीक्षा प्रभावित होना।
- विभागीय शिकायतों और अनुशासनात्मक मामलों का लंबित होना।
- निरीक्षण रिपोर्टों और जांच आख्या की गुणवत्ता पर प्रश्न उठना।
- क्षेत्रीय कार्यालयों के बीच समन्वय में कमी आना।
- शासन के निर्देशों के अनुपालन की वास्तविक स्थिति की निगरानी प्रभावित होना।
शासन से स्पष्टीकरण की मांग
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि अधिकारी वास्तव में लंबे समय से बांदा और आगरा दोनों कार्यालयों में नियमित रूप से उपस्थित नहीं हैं तो उनके दायित्वों का निर्वहन कौन कर रहा है? क्या किसी अन्य अधिकारी को विधिवत प्रभार सौंपा गया है, या फिर पूरा प्रशासनिक तंत्र दूरस्थ निर्देशों के आधार पर संचालित हो रहा है? इस संबंध में विभाग और शासन की ओर से स्पष्ट स्थिति सामने आना आवश्यक माना जा रहा है ताकि जनहित और विभागीय पारदर्शिता से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिल सके।




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