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बड़ा खुलासा: हरियाणा से यूपी तक फैला शराब माफिया का संगठित खेल — 35 लाख की खेप पकड़ी, लेकिन सिस्टम पर सबसे बड़े सवाल!



नोएडा पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 35 लाख रुपये की अवैध शराब पकड़े जाने के बाद अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र में पकड़े गए ट्रक से 237 पेटी हरियाणा मार्का शराब बरामद हुई, जिसे स्पेयर पार्ट्स के फर्जी बिलों की आड़ में लाया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपी लाखाराम (राजस्थान) ने पूछताछ में साफ कबूल किया—
 शराब हरियाणा से लाकर नोएडा में खपाई जाती थी।
यानी हरियाणा से नोएडा तक तस्करी की पुष्टि अब आधिकारिक रूप से सामने आ चुकी है।
 पहले भी पकड़ी जा चुकी है बड़ी खेप
यह कोई पहली घटना नहीं है—
 18 मार्च 2026 को भी करीब 50 लाख रुपये की अवैध शराब पकड़ी गई थी।
दो बड़ी बरामदगियों के बावजूद नेटवर्क सक्रिय रहना साफ संकेत देता है कि मामला गहरा है।
 “हरियाणा कनेक्शन” और बड़ा सिंडिकेट
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक—
इस पूरे नेटवर्क में ज्यादातर तस्कर हरियाणा से जुड़े बताए जा रहे हैं
हरियाणा के डिस्टलर और यूपी के तस्करों के बीच सीधा तालमेल है
 यानी यह सिर्फ लोकल तस्करी नहीं, बल्कि इंटर-स्टेट ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क है।
 नकली को असली बनाने का खेल
सूत्रों के अनुसार—
पटियाला के आसपास कबाड़ियों से महंगी ब्रांड की खाली बोतलें खरीदी जाती हैं
ये बोतलें बॉटलिंग यूनिट तक पहुंचाई जाती हैं
जहां रात के समय अवैध शराब की भराई कर ब्रांडेड रूप दिया जाता है
 यानी नकली शराब को “असली ब्रांड” की शक्ल देकर बाजार में उतारा जाता है।
 ट्रकों का “3 नंबर सिस्टम”
तस्करी का सबसे शातिर तरीका—
ट्रक रात में निकलते हैं
शुरुआत में एक नंबर
रास्ते में किसी ढाबे/पॉइंट पर माल अनलोड/शिफ्ट
वहां दूसरा नंबर
यूपी बॉर्डर पर पहुंचते-पहुंचते तीसरा नंबर
 यानी एक ही खेप तीन अलग-अलग पहचान के साथ सिस्टम को चकमा देती है।
 बॉर्डर के खादर इलाके बने “स्टॉक पॉइंट”
हरियाणा से सटे यूपी के इलाके इस नेटवर्क के अहम ठिकाने बताए जा रहे हैं—
बागपत
कैराना
सहारनपुर
इनसे जुड़े खादर गांवों में—
अप्रैल से जून तक स्टॉक किया जाता है
जुलाई से सितंबर तक बड़े पैमाने पर बिक्री होती है
 यानी यह पूरा ऑपरेशन “सीजनल प्लानिंग” के तहत चलता है।
⚠️ मंत्री का आदेश, लेकिन कार्रवाई ठप!
सूत्रों के मुताबिक, नितिन अग्रवाल (आबकारी मंत्री) ने
जिला आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव को गड़बड़ियों के चलते निलंबित करने का आदेश दिया था।
लेकिन—
 आज तक आदेश लागू नहीं हुआ।
अंदरखाने चर्चा है कि “ऊपर तक पहुंच” के कारण कार्रवाई अटकी हुई है।
⚠️ अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि—
 जिला आबकारी अधिकारी, डिप्टी और जॉइंट स्तर के अधिकारियों का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
इतने बड़े खुलासे और लगातार बरामदगियों के बावजूद—
न तो विभाग की तरफ से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया
न ही किसी जिम्मेदारी तय होने की जानकारी
 इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि आखिर विभाग के भीतर क्या चल रहा है?
⚠️ EIB की भूमिका पर भी उठे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, आबकारी विभाग की EIB (Excise Intelligence Bureau), जिसकी जिम्मेदारी
दिलीप मणि त्रिपाठी के पास बताई जाती है,
इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में आ गई है।
EIB का काम ही अंतर्राज्यीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा करना और उसे खत्म करना है
लेकिन इतने बड़े नेटवर्क के लगातार सक्रिय रहने से इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं
यहां तक कि अंदरखाने संलिप्तता की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं
 हालांकि, इन बिंदुओं की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
❗ सिस्टम पर सबसे बड़े सवाल
बार-बार इतनी बड़ी खेप पकड़े जाने के बावजूद तस्करी बंद क्यों नहीं?
क्या बिना विभागीय मिलीभगत के इतना बड़ा नेटवर्क संभव है?
ट्रकों के बार-बार नंबर बदलने के बावजूद चेकिंग फेल क्यों?
बॉर्डर के खादर इलाकों में स्टोरेज की जानकारी विभाग को क्यों नहीं?
मंत्री के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ?
अधिकारी खुलकर जवाब क्यों नहीं दे रहे?
EIB जैसी एजेंसी की सक्रियता कहां है?
असली “किंगपिन” अब भी बाहर क्यों हैं?
 अवध भूमि स्टाइल में सीधा वार
“बोतल पटियाला से, भराई हरियाणा में, बिक्री यूपी में…
ट्रक बदल रहा नंबर, सिस्टम खामोश क्यों है?”
 निष्कर्ष
यह मामला अब सिर्फ 35 लाख की बरामदगी नहीं—
 यह हरियाणा–यूपी के बीच फैले शराब माफिया के संगठित नेटवर्क का बड़ा खुलासा है
अब असली परीक्षा है—
क्या कार्रवाई सिर्फ ड्राइवर और छोटे तस्करों तक सीमित रहेगी?
या
सिस्टम के अंदर बैठे जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचेगी?

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