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खबर: आबकारी विभाग के बारकोड हटाने पर बवाल, ओएसिस कंपनी पर गंभीर सवाल

लखनऊ।
आबकारी मुख्यालय से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह के स्तर से 20 अगस्त की शाम सहायक आबकारी आयुक्त, डिप्टी और जॉइंट लेवल अधिकारियों की अचानक वर्चुअल मीटिंग बुलाई गई। इस मीटिंग में अधिकारियों को एक अहम डाटा डाउनलोड करने का निर्देश दिया गया।

चौंकाने वाली बात यह है कि आबकारी विभाग की ओर से डिस्टलरी को जारी होने वाला बारकोड (EAL) अब रिमूव किया जा रहा है। सवाल उठता है कि जब यही बारकोड सुरक्षा और ट्रैकिंग का सबसे अहम साधन है तो इसे हटाने की ज़रूरत क्यों महसूस हुई।

सूत्रों के अनुसार IESCMS पोर्टल पर ट्रेस एंड ट्रैक सिस्टम संभालने वाली कंपनी ओएसिस पर आरोप है कि वह बारकोड प्रिंट करने में नाकाम रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि—
➡️ जब ओएसिस को केवल ट्रेस एंड ट्रैक सिस्टम के लिए टेंडर मिला था तो फिर डिस्टलरी निकासी के लिए सिक्योरिटी फीचर वाला बारकोड प्रिंट करने की जिम्मेदारी उसे किसके आदेश पर दी गई?
➡️ क्या आबकारी आयुक्त चोरी और गड़बड़ी उजागर होने के डर से डाटा रिमूव करा रहे हैं?

सबसे गंभीर आशंका यह जताई जा रही है कि कहीं ओएसिस कंपनी ने सिक्योरिटी बारकोड लीक करके डिस्टलरी को अवैध निकासी में मदद तो नहीं की। यदि यह सच साबित होता है तो मामला बेहद गंभीर है और सीधे तौर पर राजस्व हानि व भ्रष्टाचार से जुड़ता है।

फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच बेहद जरूरी है ताकि यह साफ हो सके कि आखिर बारकोड रिमूव करने की असली वजह क्या है और इससे किसे फायदा पहुंचाया जा रहा है।


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