
आबकारी विभाग की साप्ताहिक वर्चुअल राजस्व समीक्षा बैठक उस समय बेहद तनावपूर्ण हो गई जब सबसे कम राजस्व अर्जित करने वाले टॉप-5 जिलों में शामिल बिजनौर की समीक्षा के दौरान कमिश्नर ने प्रमुख सचिव की मौजूदगी में डीईओ वरुण कुमार को लेकर तीखा तंज कस दिया।
कमिश्नर की टिप्पणी — “इनका क्या ही कर सकते हैं, ये तो बहुत बड़े वाले…” — अब पूरे विभाग में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जानकार मानते हैं कि यह टिप्पणी केवल डीईओ बिजनौर वरुण कुमार पर व्यक्तिगत व्यंग्य नहीं थी, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से उन संरक्षणवादी व्यवस्थाओं पर भी सवाल था जिनके चलते खराब प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई मुश्किल हो जाती है। विभागीय गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि वरुण कुमार को प्रमुख सचिव का करीबी माना जाता है। ऐसे में समीक्षा बैठक में सार्वजनिक रूप से किया गया यह व्यंग्य सीधे सत्ता संरचना पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
कमिश्नर का संकेत साफ माना जा रहा है कि यदि कम राजस्व देने वाले अधिकारियों को संरक्षण मिलता रहेगा तो विभागीय जवाबदेही और राजस्व सुधार दोनों प्रभावित होंगे।
बैठक में प्रमुख सचिव ने डिस्टलरी पर कड़ी निगरानी रखने, जमा-निकासी और गेट पास व्यवस्था को सख्ती से मॉनिटर करने के निर्देश दिए। लेकिन इसी के साथ विभाग के भीतर तैनाती व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
उदाहरण के तौर पर मुबारक अली की मूल तैनाती गोविंद शुगर मिल डिस्टलरी में बताई जाती है, लेकिन वह लंबे समय से मुख्यालय में अटैच हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उनकी अनुपस्थिति में डिस्टलरी में जमा और निकासी के गेट पास पर काउंटर साइन कौन कर रहा है।
इसी तरह डॉ. निरंकार पांडे की पोस्टिंग मुजफ्फरनगर की त्रिवेणी डिस्टलरी में होने के बावजूद वह कथित तौर पर लखनऊ में कमिश्नर से जुड़े प्रकरणों की सुनवाई देख रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब अधिकारी लगभग 700 किलोमीटर दूर मौजूद हैं तो डिस्टलरी के भीतर होने वाली जमा-निकासी, गेट पास और अन्य संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी आखिर कैसे हो रही है।
विभागीय हलकों में अब यह चर्चा तेज है कि यदि डिस्टलरी में तैनात अधिकारी मुख्यालयों में अटैच रहेंगे तो अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण कैसे संभव होगा।
लेकिन पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश बिजनौर समीक्षा के दौरान आया वह तंज माना जा रहा है, जिसने साफ कर दिया कि आबकारी विभाग में अब “संरक्षण बनाम प्रदर्शन” की लड़ाई खुलकर सतह पर आ चुकी है।




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