
दोषी अफसर को वाराणसी जैसी अहम पोस्टिंग!
पंचायती राज विभाग के तबादलों पर उठे गंभीर सवाल
के पंचायती राज विभाग में हुए ताजा तबादलों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार ने 6 जिलों के जिला पंचायती राज अधिकारियों (DPRO) के तबादले करते हुए नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा आलोक कुमार सिन्हा की वाराणसी जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण जनपद में नियुक्ति को लेकर हो रही है।
जारी आदेशों के अनुसार नीरज सिन्हा को का जिला पंचायत राज अधिकारी बनाया गया है, जबकि श्रेया उपाध्याय को भेजा गया है। वहीं आलोक कुमार सिन्हा को का जिला पंचायत राज अधिकारी नियुक्त किया गया है। संतोष कुमार श्रीवास्तव को की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल आलोक कुमार सिन्हा की नियुक्ति पर खड़ा हो गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार उन पर पहले पद के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लग चुका है। मामला एक सफाई कर्मी की नियुक्ति से जुड़ा था, जिसमें आरोप था कि उन्होंने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। जांच में उन्हें दोषी भी पाया गया था। ऐसे में अब उन्हें वाराणसी जैसे वीआईपी और अत्यंत महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी दिया जाना कई अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
विभाग के अंदर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब किसी अधिकारी पर गंभीर प्रशासनिक अनियमितता के आरोप साबित हो चुके हों, तब उसे दंडात्मक कार्रवाई के बजाय और अधिक महत्वपूर्ण जनपद की पोस्टिंग क्यों दी जा रही है? अधिकारियों का मानना है कि इससे विभाग में गलत संदेश जाएगा और ईमानदार अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा।
सूत्रों का कहना है कि वाराणसी केवल प्रशासनिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण जिला माना जाता है। ऐसे जिले में नियुक्ति सामान्य तौर पर बेहद भरोसेमंद और साफ छवि वाले अधिकारियों को दी जाती है। यही वजह है कि आलोक कुमार सिन्हा की तैनाती को लेकर विभाग के भीतर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
तबादला सूची सामने आने के बाद अब यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या पंचायती राज विभाग में योग्यता और सेवा रिकॉर्ड से ज्यादा “सिस्टम” काम कर रहा है? विपक्षी दलों और विभागीय कर्मचारियों के बीच भी यह मामला चर्चा में है। कई लोग इसे विभागीय जवाबदेही और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल मान रहे हैं।




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